रोहतक में नेशनल प्लेयर की मौत: पैसा आया, शिकायतें हुईं… फिर भी स्टेडियम क्यों नहीं सुधरा?
खेल सिस्टम की लापरवाही ने छीनी 17 साल की जान
हरियाणा के रोहतक में 17 वर्षीय नेशनल बास्केटबॉल खिलाड़ी हार्दिक राठी की दर्दनाक मौत ने प्रदेश के खेल तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभ्यास के दौरान एक जर्जर बास्केटबॉल पोल अचानक टूटकर गिर पड़ा और उसी के नीचे दबकर हार्दिक की जान चली गई। CCTV फुटेज में साफ दिखा कि एक सामान्य डंक लगाने के दौरान पोल ने अचानक दम तोड़ दिया और स्टेडियम की असलियत देश के सामने आ गई।
11 लाख की ग्रांट… फिर भी जर्जर? चार साल पहले कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने गांव के खेल मैदान के लिए 11 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। यह राशि मैदान के सुधार, सुविधाओं के उन्नयन और खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए दी गई थी।लेकिन आज की स्थिति बताती है कि या तो पैसा खर्च नहीं हुआ, या फिर कहीं और बह गया क्योंकि मैदान पर लगी बास्केटबॉल पोल इतनी जर्जर थी कि हल्के प्रेशर में भी ढह गई।
ग्रामीण तीन महीने पहले CM से मिले थे फिर भी मरम्मत नहीं हुई स्थानीय लोग बताते हैं कि तीन महीने पहले वे मुख्यमंत्री नायब सैनी से मिलकर मैदान की मरम्मत की मांग कर चुके थे। इसके बावजूद न तो पोल बदला गया, न ग्राउंड में कोई सुधार दिखा।अब बड़ा सवाल ,क्या सरकार के पास मरम्मत के आदेश जारी करने का वक्त नहीं था?या फिर फाइलें सिर्फ घूमती रहीं और खिलाड़ी मरते रहे?सिस्टम की नींद आखिर कब टूटेगी?एक होनहार बच्चे की मौत ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। राजनीति में ‘खेलों को बढ़ावा’ देने की बातें खूब होती हैं लेकिन जमीन पर हाल ये है कि खिलाड़ियों के सिर पर लगे पोल तक सुरक्षित नहीं हैं।
पैसा दिया गया → सुधार नहीं हुआ सीएम से शिकायत की गई → कार्रवाई नहीं हुई पोल टूटा → खिलाड़ी मर गया अब प्रशासन इसे “दुर्घटना” कहकर आगे बढ़ जाएगा?या कोई जिम्मेदार तय होगा?
खेल नहीं, हादसा बनता जा रहा है सिस्टम हार्दिक राठी सिर्फ 17 साल का था। नेशनल लेवल पर खेल चुका था। बड़ा खिलाड़ी बनने का सपना था। लेकिन जिस मैदान पर उसे बेहतर होना था, वही उसकी जान ले बैठा।और ऐसे हादसे सिर्फ एक सवाल पूछते हैं—भारत खेलों में मेडल कैसे जीतेगा, जब मैदानों की सुरक्षा तक सरकारें सुनिश्चित नहीं कर पा रहीं?













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