क्यों कुछ लोग कानून से नहीं डरते?
जवाब✨ क्योंकि उन्हें पता है — ऊपर कोई ना कोई उनके लिए खड़ा है।
अजीब समय है 😐 गलती करने वाला डरता नहीं…
और कानून का सम्मान करने वाला ही परेशान रहता है।
हर गली–चौराहे पर हम ये दृश्य देखने लगे हैं:
कुछ लोग ऐसे चलते हैं जैसे सड़क, सिस्टम, कानून—सब इन्हीं की जागीर हो।
ऐसा लगता है जैसे इनके जेब में FIR का रिमोट और ऊपर से फोन का नेटवर्क हमेशा फुल सिग्नल में होता है।
Why ??
कारण बहुत साफ है।
1️⃣ राजनीतिक संरक्षण का ‘साइलेंट पावर बैंक’
कुछ लोग जानते हैं कि अगर आज गलती हो भी गई,
तो कल किसी नेता का एक फोन पूरा मामला ठंडा कर देगा।और सच्चाई ये है कि कई बार ऐसा होता भी है।
जब गलत करने वालों को बार-बार बचा लिया जाता है,
तो उनके भीतर एक अलग ही लेवल का आत्मविश्वास पैदा हो जाता है—
“हमसे कोई कुछ नहीं करेगा।”
2️⃣ सिस्टम के छोटे लोग भी ऊपर की तरफ देखते हैं
थाने से लेकर दफ्तर तक,अक्सर अधिकारी कार्रवाई शुरू करते हैं,
लेकिन जैसे ही ऊपर से किसी का नाम आता है—
फाइल की रफ्तार अचानक ब्रेक मार देती है।
सिस्टम के लोग भी सोचते हैं 🤔
“क्या जरूरत है किसी ताकतवर के खिलाफ जाने की?
कल को हम ही फंस जाएंगे।”🤫
और यहीं से कानून का डर खत्म होने लगता है।
3️⃣ समाज की चुप्पी अपराध को ताकत देती है
गलत काम जब पहली बार होता है,तब रोकने वाला कोई नहीं मिलता।
लोग दूर से देखते हैं,सोचते हैं — “हम क्यों पचड़े में पड़ें?”
और यही चुप्पी हिम्मत की जगह हौसला बन जाती है।
फिर वही लोग खुलकर नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं,
क्योंकि उन्हें पता है कि ना जनता बोलेगी, ना सिस्टम टकराएगा, ना कानून अड़ेगा।
4️⃣ कानून अब ‘समझने की चीज़’ नहीं, ‘मैनेज करने की चीज़’ बन गया है
कई लोग कानून का मतलब अब नियम नहीं समझते
बल्कि जुगाड़, रिश्ते, फोन और पहचान समझते हैं।
कानून को तोड़कर लोग गर्व से कहते हैं:
“अरे, मैं सब मैनेज करवा दूंगा।”
जब कानून पर जुगाड़ हावी हो जाए,
तो फिर डर किस बात का बचेगा?
और सबसे बड़ा कारण?
कुछ लोग डरते इसलिए नहीं,क्योंकि उन्हें कभी डराया ही नहीं गया।
कानून का डंडा सिर्फ आम आदमी पर चले,
और VIP संस्कृति के पास सिर्फ छूट हो ,तो असंतुलन पैदा होना ही है।
निष्कर्ष सीधी language में
जब गलत करने वाला सुनिश्चित हो जाए कि
ऊपर से फोन आ जाएगा,
तो वो कानून को रूल बुक नहीं,
बल्कि रबरबैंड समझता है—
कभी भी खींच लो, कहीं भी ढीला कर लो।
कानून की असली ताकत तभी लौटेगी
जब संरक्षण की राजनीति खत्म होगी,
और गलती करने वाले को
वही सज़ा मिले जो हर आम नागरिक को मिलती है।













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