*2025 में संक्रमण का प्रभाव: भारत की कुंडली के अनुसार ज्योतिषीय विश्लेषण*

2025 में भारत की स्वतंत्रता की वृषभ लग्न कुंडली पर आधारित विश्लेषण के अनुसार, इस वर्ष कोविड जैसे संक्रमण की पुनरावृत्ति ज्योतिषीय दृष्टिकोण से स्पष्ट संकेत देती है, किंतु यह पहले की भांति विकराल नहीं होगी। वर्तमान में देश मंगल की महादशा और बुध की अंतर्दशा से गुजर रहा है, जो सितंबर 2024 से फरवरी 2026 तक प्रभावी है। भारत की कुंडली में मंगल तीसरे और आठवें भाव का स्वामी होकर कर्क राशि में स्थित है, जहाँ वह चंद्रमा के साथ युति करता है। यह स्थिति रहस्यमय रोगों, संक्रमणों और आकस्मिक घटनाओं को जन्म देती है। साथ ही यह मानसिक भय, स्वास्थ्य संकट और सामूहिक भ्रम जैसी परिस्थितियाँ निर्मित कर सकती है। बुध की अंतर्दशा इस पूरे समय में सूचना, मीडिया, वैक्सीनेशन और मेडिकल रिसर्च को तीव्र करती है, जिससे अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ-साथ वैज्ञानिक समाधान भी उभरते हैं।

शनि इस समय कुंभ राशि में गोचर कर रहा है जो भारत की चंद्र कुंडली से अष्टम स्थान में आता है। यह स्थिति रोग, मृत्यु, गुप्त भय और सामाजिक अस्थिरता से जुड़ी होती है। 2020–21 में जब कोविड पहली बार उभरा था, तब भी शनि मकर राशि में गोचर कर रहा था। हालांकि इस बार फर्क यह है कि वर्तमान में भारत का वैक्सीनेशन, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और जन-जागरूकता पहले से अधिक सशक्त है, जिससे गंभीरता अपेक्षाकृत कम रहेगी।

राहु इस समय मीन राशि में गोचर कर रहा है जो भारत की कुंडली के 11वें भाव में आता है। यह भाव सामाजिक नेटवर्क, कानून व्यवस्था और सामूहिक गतिविधियों से जुड़ा है। राहु का यह गोचर गुप्त संक्रमणों की पुनरावृत्ति कर सकता है, किंतु साथ ही “तत्काल समाधान” और नीतिगत जवाबदेही की स्थितियाँ भी बनाता है।

यदि हम तुलना करें, तो यह संक्रमण लहर 2020–21 की तुलना में कम प्रभावशाली रहेगी। इसका प्रभाव अधिकतर मनोवैज्ञानिक भय, हल्की अस्वस्थता और प्रशासनिक चुनौती के रूप में होगा। स्वास्थ्य सेवा तंत्र के सुदृढ़ होने के कारण यह महामारी विकराल रूप नहीं लेगी, हालांकि अफवाह, सूचनात्मक भ्रम और भावनात्मक अस्थिरता बढ़ सकती है।

ज्योतिषीय समाधान के रूप में, राहु शांति हेतु “दुर्गा सप्तशती” का पाठ करना शनि की स्थिति को संतुलित करने हेतु “महालक्ष्मी स्तोत्र” का 11 बार पाठ करें। मंगल–बुध के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए तांबे के बर्तन में तुलसी डालकर जल पीना चाहिए। सामूहिक रूप से गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना और बेसहारा लोगों को भोजन दान करना शुभ रहेगा।

यह समय सावधानी और संयम का है-भय नहीं, विवेक जरूरी है। ज्योतिषीय संकेत बताते हैं कि यदि जागरूकता और अनुशासन बना रहा, तो भारत इस संक्रमण को पहले से बेहतर ढंग से संभालने में सक्षम रहेगा।

पंडित कान्हा शास्त्री
(ज्योतिर्विद-लेखक और सामाजिक चिंतक)