💧 तालाब सूखेंगे तो प्यासे होंगे शहर – खरसिया में जल संकट की आहट
खरसिया। भीषण गर्मी की शुरुआत होते ही खरसिया में जल संकट की आशंका को लेकर सियासत भी गरमाने लगी है। शहर में तालाबों के सौंदर्यीकरण के नाम पर भरे हुए तालाबों का पानी निकालने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। इस मुद्दे पर शहर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने बैठक कर चिंता जताई और इसे भविष्य में संभावित जल संकट से जोड़ते हुए प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का फैसला किया।
बैठक में कार्यकर्ताओं ने कहा कि गर्मी के मौसम में तालाबों को खाली करना जल संरक्षण की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है। उनका मानना है कि तालाबों का पानी निकालने से आसपास के नलकूपों और भूजल स्रोतों पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे क्षेत्र का जलस्तर तेजी से नीचे जा सकता है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था पर भी बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चर्चा के बाद निर्णय लिया कि इस मामले में खरसिया नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) और अनुभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) को औपचारिक आवेदन देकर स्थिति से अवगत कराया जाएगा, ताकि समय रहते इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जा सके।
बैठक में यह भी कहा गया कि यदि नगर पालिका का रुख इसी तरह बना रहा तो भविष्य में खरसिया शहर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तालाबों से पानी निकालने जैसे फैसलों पर पुनर्विचार किया जाए।
इस पूरे मामले ने खरसिया में एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—क्या सौंदर्यीकरण के नाम पर शहर के जल स्रोतों को खाली करना सही फैसला है, या फिर यह आने वाले समय के लिए संकट की चेतावनी है?













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