रायगढ़ में ‘क्राइम गैंग’ का खेल खत्म: मोबाइल चोरी से बैंक लूट तक की साजिश का बड़ा खुलासा, पुलिस ने ऐसे तोड़ी कमर
रायगढ़ में अपराध की दुनिया में तेजी से पैर पसार रहा एक शातिर गैंग आखिरकार पुलिस के शिकंजे में आ ही गया। मोबाइल दुकान में बड़ी चोरी से लेकर बैंकों में लूट की खौफनाक साजिश रचने वाले इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश ऐसे हुआ, जैसे किसी फिल्म का क्लाइमेक्स हो जहां हर सुराग एक नई परत खोलता गया और आखिर में पूरा गैंग बेनकाब हो गया।
इस कहानी की शुरुआत होती है फरवरी की उस रात से, जब घरघोड़ा थाना क्षेत्र के कुडुमकेला में एक मोबाइल दुकान का शटर टूटा मिला। अंदर से दर्जनों मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और नकदी गायब थी। पहली नजर में ये एक सामान्य चोरी लग रही थी, लेकिन पुलिस को अंदाजा नहीं था कि ये एक बड़े अपराधी नेटवर्क की पहली कड़ी है।
इसके बाद घटनाओं ने अचानक रफ्तार पकड़ ली। 15-16 मार्च की रात धरमजयगढ़ के ग्रामीण बैंक और फिर 16-17 मार्च को रायगढ़ के जूटमिल स्थित पंजाब नेशनल बैंक को निशाना बनाने की कोशिश हुई। हालांकि आरोपी अपने मंसूबों में सफल नहीं हो पाए, लेकिन उन्होंने जो तरीका अपनाया, उसने पुलिस को चौंका दिया सीसीटीवी कैमरे तक उखाड़ लिए गए, ताकि कोई सबूत न बचे।
अब ये सिर्फ चोरी या लूट का मामला नहीं था… ये एक सुनियोजित ‘क्राइम ऑपरेशन’ था।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में पुलिस ने इसे चुनौती के रूप में लिया। सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, मुखबिर तंत्र सक्रिय हुआ और हर छोटे से छोटे सुराग को जोड़ा गया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एक चेहरा बार-बार सामने आने लगा मोहम्मद अरसलान।
और फिर आया वो मोड़, जहां कहानी ने करवट ली।
घरघोड़ा पुलिस ने सटीक सूचना के आधार पर अरसलान को दबोचा। पूछताछ शुरू हुई और कुछ ही घंटों में पूरा ‘क्राइम ब्लूप्रिंट’ सामने आ गया। अरसलान कोई आम आरोपी नहीं था वह इस गैंग का मास्टरमाइंड था, जिसने अपने हमउम्र युवकों का एक पूरा नेटवर्क खड़ा कर रखा था।
इस गैंग का तरीका भी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं था पहले इलाके की रेकी, फिर सुनसान और सड़क किनारे स्थित दुकानों व बैंकों को टारगेट करना… रात के अंधेरे में वारदात को अंजाम देना… और फिर सबूत मिटाने के लिए सीसीटीवी सिस्टम तक उखाड़ ले जाना।
मोबाइल दुकान की चोरी के बाद आरोपियों ने सामान को जंगल में छिपा दिया था, ताकि बाद में आराम से बेच सकें। वहीं बैंक लूट के लिए उन्होंने अलग-अलग गाड़ियों मारुति सियाज और महिंद्रा XUV-500—का इस्तेमाल किया।
लेकिन इस बार किस्मत नहीं, कानून जीता।
पुलिस ने एक-एक कर इस गैंग के सभी सदस्यों को अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार कर लिया। कुल 6 आरोपी जिनमें एक नाबालिग भी शामिल है अब सलाखों के पीछे हैं। इनके पास से 2 चारपहिया वाहन, 60 मोबाइल फोन और अन्य सामान सहित करीब 26 लाख 47 हजार रुपये की संपत्ति बरामद की गई है।
इस ऑपरेशन ने न सिर्फ तीन बड़े मामलों का खुलासा किया, बल्कि एक संभावित बड़ी बैंक लूट को भी होने से पहले ही रोक दिया।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि रायगढ़ पुलिस ऐसे संगठित अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। “व्यवसायिक प्रतिष्ठानों और बैंकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है… ऐसे गिरोहों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”
रायगढ़ पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अपराध कितना भी शातिर क्यों न हो… कानून की पकड़ से बच पाना अब आसान नहीं।













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