मां बुला रही है खरसिया का सौभाग्य बना धाम माई धाम

मां बुला रही हैं… खरसिया का सौभाग्य बना धामा माई धाम

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खरसिया की पावन धरती पर आज 18 फरवरी की सुबह एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ शुरू हुई। श्री धामा माई धाम मंदिर परिसर में सबसे पहले विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती संपन्न हुई। मंदिर घंटियों की ध्वनि, शंखनाद और “जय धामा माई” के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

आरती के बाद भव्य कलश यात्रा की शुरुआत हुई। पीले और लाल वस्त्रों में सजे बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग और युवा—सबके हाथों में माँ का ध्वज लहराता हुआ दिखाई दे रहा था। छोटे-छोटे बच्चे पूरे उत्साह के साथ नारे लगा रहे थे, जिससे पूरा नगर गूंज उठा।

कलश यात्रा धामा माई धाम मंदिर से प्रारंभ होकर सादगी और श्रद्धा के साथ नगर भ्रमण पर निकली। बाजा-गाजा, भक्ति गीत और जयकारों के बीच यह यात्रा भगत तालाब तक पहुँची, जहाँ विधिपूर्वक जल भरकर पूजन किया गया। इसके बाद यात्रा पुनः नगर भ्रमण करते हुए मंदिर परिसर लौटी और कलशों की स्थापना की गई।मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बैठने की सुंदर व्यवस्था की गई थी।

नगर के कोने-कोने से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। महिलाएँ सोलह श्रृंगार में, बच्चे सजे-धजे परिधानों में और बुजुर्ग आशीर्वाद की मुद्रा में उपस्थित रहे।पूरे कार्यक्रम के बाद प्रसाद वितरण किया गया।

श्रद्धालु एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते दिखाई दिए—यह दृश्य केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि खरसिया की एकता और आस्था का प्रतीक बन गया।धामा माई धाम केवल एक मंदिर नहीं… बल्कि खरसिया का गौरव और सौभाग्य बनता जा रहा है।

नगरवासियों का मानना है कि यह धाम आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक ऊर्जा और विश्वास का केंद्र बनेगा।खरसिया सच में धन्य है, जहाँ माँ की ऐसी कृपा बरस रही है।

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