भव्य राष्ट्रवाद का समर्पित आयोजन “पुलवामा के शेर”शहीदों की स्मृति में श्रद्धांजलि, सम्मान और राष्ट्रप्रेम का संदेश14 फरवरी की शाम देशभक्ति, बलिदान और समर्पण के नाम रही।
“पुलवामा के शेर” शीर्षक से आयोजित यह भव्य कार्यक्रम शहीदों और उनके परिवारों को समर्पित एक भावनात्मक श्रद्धांजलि रहा। यह आयोजन पूर्व सैनिक संगठन “सिपाही” के सूत्रधारत्व में तथा “श्री संस्कार फाउंडेशन” की सहभागिता से संपन्न हुआ।पिछले सात वर्षों से यह कार्यक्रम युद्ध स्मारक, अमर जवान चौक (सीएमडी चौक) पर आयोजित किया जा रहा है।
वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में Central Reserve Police Force (सीआरपीएफ) के 40 जवान शहीद हुए थे। उन्हीं अमर बलिदानियों की स्मृति में प्रत्येक वर्ष श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है।
शाम 4 बजे युद्ध स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जिसमें पूर्व सैनिक, एनसीसी कैडेट्स, सीआरपीएफ व पुलिस के जवान, सशस्त्र सलामी दल, स्काउट गाइड के बच्चे और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। इसके पश्चात 4:15 बजे सीएमडी कॉलेज मैदान में शहीद परिवार सम्मान समारोह आयोजित हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता की आरती, दीप प्रज्वलन और राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के साथ हुई। देशभक्ति गीतों, एकल प्रस्तुतियों और कविताओं ने वातावरण को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भारतीय वायु सेवा के वरिष्ठ अधिकारी एवं पूर्व सैनिक संगठन “सिपाही” के मुख्य संरक्षक ग्रुप कैप्टन संजय पांडे ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डिप्टी कमांडेंट, सीआरपीएफ अभिजीत प्रभात उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में विभिन्न सामाजिक संगठनों, चिकित्सा जगत, विधि क्षेत्र और स्काउट गाइड से जुड़े गणमान्य नागरिक शामिल हुए।
समारोह में छत्तीसगढ़ के अनेक वीर शहीदों के परिवारों का स्नेहपूर्वक सम्मान किया गया। वीर माताओं, वीर नारियों, वीर पिताओं और वीर पुत्रों को मंच पर आमंत्रित कर राष्ट्र की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की गई। साथ ही नक्सल ऑपरेशनों और अन्य अभियानों में बहादुरी दिखाने वाले सीआरपीएफ एवं पुलिस के जवानों को भी सम्मानित किया गया।
पूर्व सैनिक संगठन “सिपाही” के प्रमुख एवं पूर्व सैनिक महासभा अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह राणा के ओजस्वी शब्दों ने उपस्थित जनसमूह में राष्ट्रभक्ति और शौर्य का संचार किया।कार्यक्रम के अंत में “श्री संस्कार फाउंडेशन” की अध्यक्षा श्रीमती सोनिया साहू ने संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया।
संचालन डॉ. सुषमा पंड्या द्वारा किया गया।“पुलवामा के शेर” केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प है—जहां शहीदों का सम्मान ही सर्वोच्च राष्ट्रधर्म माना गया।















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