बलरामपुर में बक्साइट कार्रवाई पर बवाल: एसडीएम सहित चार गिरफ्तार, ग्रामीण की मौत से उठे कई सवाल
🔴 बलरामपुर में बक्साइट कार्रवाई पर बवाल: एसडीएम सहित चार गिरफ्तार, ग्रामीण की मौत से उठे कई सवालछत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने प्रशासनिक तंत्र और ग्रामीण इलाकों के बीच भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अवैध बक्साइट उत्खनन पर कार्रवाई करने पहुंची टीम पर मारपीट का आरोप लगा है, और इस पूरे घटनाक्रम में 62 वर्षीय एक ग्रामीण की मौत हो गई।
क्या है पूरा मामला?
थाना कोरंधा में दर्ज अपराध क्रमांक 03/2026 के अनुसार, 15 फरवरी 2026 की देर शाम पुलिस को सूचना मिली कि ग्राम हंसपुर के जंगल में तीन ग्रामीणों के साथ मारपीट की गई है। सभी घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान राम उर्फ रामनरेश (उम्र 62 वर्ष) ने दम तोड़ दिया।प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद गंभीर हैं। बताया जा रहा है कि कुसमी के एसडीएम करूण डहरिया अपने तीन साथियों के साथ कथित अवैध बक्साइट उत्खनन पर कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान तीन ग्रामीणों के साथ मारपीट की गई, जिससे एक की मौत हो गई और अन्य घायल हो गए।
पुलिस की कार्रवाई
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने बीएनएस की धारा 103(1), 115(2) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया है। एसडीएम सहित चारों आरोपियों—विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजीत कुमार यादव और सुदीप यादव—को हिरासत में लेकर विधिवत गिरफ्तार किया गया है और न्यायालय में पेश किया जा रहा है।यह घटना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का नाम सामने आया है। आमतौर पर अवैध उत्खनन के मामलों में कार्रवाई प्रशासन द्वारा की जाती है, लेकिन यदि कार्रवाई के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग या मारपीट के आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
गांव में माहौल और आगे की जांच
ग्राम हंसपुर और आसपास के क्षेत्रों में घटना के बाद से तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों में आक्रोश है, वहीं प्रशासनिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है।पुलिस का कहना है कि प्रकरण की विस्तृत विवेचना जारी है और सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गवाहों के बयान इस मामले में अहम भूमिका निभाएंगे।
बड़ा सवाल
क्या अवैध उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान प्रक्रिया का पालन हुआ?
क्या बल प्रयोग की सीमा पार की गई?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या एक बुजुर्ग ग्रामीण की जान बचाई जा सकती थी?
इन सवालों के जवाब अब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल इतना तय है कि बलरामपुर की यह घटना प्रशासन और आमजन के रिश्तों पर गहरी छाप छोड़ गई है।















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