सक्ती में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का धरना विवादों में, पट्टाधारियों ने लगाए ब्लैकमेल के गंभीर आरोप

सक्ती में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का धरना विवादों में, पट्टाधारियों ने लगाए ब्लैकमेल के गंभीर आरोप

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सक्ती। जिला मुख्यालय सक्ती में पिछले एक महीने से कलेक्टोरेट कार्यालय जेठा के सामने स्थित शासकीय भूमि खसरा नंबर 1311 को लेकर चल रहा धरना अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा किए जा रहे इस धरना प्रदर्शन को लेकर पट्टाधारियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं और इसे “निजी स्वार्थ से प्रेरित” बताया है।

पार्टी की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि खसरा नंबर 1311, जो मूल रूप से शासकीय भूमि है, का राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज कर अवैधानिक तरीके से क्रय-विक्रय किया गया है। उनकी मांग है कि उक्त भूमि को पुनः शासन मद में दर्ज किया जाए।

हालांकि, दूसरी ओर पट्टाधारियों का कहना है कि लगभग 50 वर्ष पूर्व शासन द्वारा विधिवत पट्टे प्रदान किए गए थे। तब से संबंधित कृषक भूमि पर काबिज हैं और राजस्व अभिलेखों में उनके नाम नियमित रूप से दर्ज हैं। शासन के प्रावधानों के अनुसार 20 वर्ष या उससे पूर्व पट्टे पर प्राप्त भूमि के हस्तांतरण के लिए कलेक्टर या अन्य अधिकारी की अनुमति आवश्यक नहीं होती। ऐसे में क्रय-विक्रय प्रक्रिया को नियमसंगत बताया जा रहा है।
मामले ने तब तूल पकड़ा जब कुछ पट्टाधारियों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर आरोप लगाया कि उनसे कथित व्यक्तियों द्वारा 10 लाख रुपये की मांग की गई। कथित रूप से धमकी दी गई कि यदि राशि नहीं दी गई तो भूमि का क्रय-विक्रय निरस्त करवा दिया जाएगा और भूमि को पुनः शासन मद में दर्ज कराने की कार्रवाई करवाई जाएगी।

इन आरोपों के बाद क्षेत्र में भय और असमंजस का माहौल बन गया है। पट्टाधारियों का कहना है कि यह धरना चौथी बार आयोजित किया जा रहा है और इसे दबाव की रणनीति के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

स्थानीय प्रशासन पर भी दबाव की बात सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि धरना प्रदर्शन के कारण प्रशासनिक तंत्र असहज स्थिति में है। हालांकि, प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह धरना वास्तव में शासकीय हित में है, या फिर इसके पीछे कोई और मंशा काम कर रही है?

आने वाले दिनों में प्रशासनिक जांच और कानूनी स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तस्वीर साफ हो पाएगी।

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