‘विष्णु’ के राज में ‘चौधरी’ का बजट… गांव, गरीब, किसान और युवा बेहाल : नगेन्द्र नेगी
रायगढ़ जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष ने तीसरे बजट को बताया “आंकड़ों की बाजीगरी”
रायगढ़।प्रदेश सरकार के तीसरे बजट को लेकर सियासत तेज हो गई है। रायगढ़ जिला कांग्रेस ग्रामीण के अध्यक्ष नगेन्द्र नेगी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी पर तीखा हमला बोलते हुए बजट को “जन-कल्याण नहीं, बल्कि आंकड़ों की बाजीगरी और विज्ञापनों का पुलिंदा” करार दिया है।
नेगी ने बयान जारी कर कहा कि इस बजट में ‘नवा छत्तीसगढ़’ की सोच कहीं नजर नहीं आती। उनके मुताबिक, यह दस्तावेज प्रदेश की जमीनी जरूरतों से ज्यादा राजनीतिक संदेश देने वाला प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री हाई-टेक शब्दावली और एआई की बातें तो करते हैं, लेकिन गांवों में बुनियादी सुविधाएं अब भी चरमराई हुई हैं।
नेगी ने तंज कसते हुए कहा, “प्रदेश को फिलहाल लैपटॉप और एआई से पहले रोटी और रोजगार की जरूरत है। आंकड़ों से पन्ने भरे जा सकते हैं, लेकिन गरीब की खाली जेब नहीं।”
किसानों के मुद्दे पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को लेकर कोई स्पष्ट गारंटी नहीं दी गई है, जबकि खाद और बीज की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। युवाओं को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा और कहा कि डिग्रीधारी युवा रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं, लेकिन नई भर्ती या ठोस रोजगार सृजन की कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है।
महंगाई पर भी कांग्रेस ने हमला बोला। नेगी के अनुसार, रसोई गैस और खाद्य तेल जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर राहत देने का कोई प्रावधान बजट में नहीं दिखता। उन्होंने विशेष रूप से पंचायतों और ग्रामीण विकास पर चिंता जताते हुए कहा कि स्थानीय निकायों को मजबूत करने की दिशा में स्पष्ट विजन नजर नहीं आता।
रायगढ़ जैसे औद्योगिक जिले का जिक्र करते हुए नेगी ने कहा कि स्थानीय युवाओं को उद्योगों में प्राथमिकता देने की बाध्यता का अभाव सरकार की नीति पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि बुनियादी ढांचे के नाम पर बड़े ठेकों की घोषणाएं तो हैं, लेकिन ग्रामीण सड़कों और जल निकासी जैसी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
अंत में नेगी ने कहा कि रायगढ़ जिला कांग्रेस ग्रामीण इस बजट के खिलाफ गांव-गांव जाकर जनजागरूकता अभियान चलाएगी और लोगों को बताएगी कि यह बजट आम जनता की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरता।प्रदेश का बजट जहां सरकार के लिए विकास का रोडमैप है, वहीं विपक्ष इसे जमीनी हकीकत से दूर बता रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना रहेगा।
















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