कोरबा की हवा बनी जहर! दीपका खदान की धूल से लोग बीमार, आंदोलन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कोयला खदानों से उठने वाली धूल अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर मुसीबत बनती जा रही है। South Eastern Coalfields Limited (SECL) के दीपका क्षेत्र की खदानों से निकलने वाली कोल डस्ट के कारण इलाके की हवा जहरीली होती जा रही है। हाल ही में किए गए सर्वे में यहां वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा को पार कर गया है।रिपोर्ट के मुताबिक, दीपका क्षेत्र में पीएम 2.5 का स्तर 374 और पीएम 10 का स्तर 411 दर्ज किया गया, जो वायु गुणवत्ता की “गंभीर” श्रेणी में आता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह स्तर लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि शाम होते ही पूरा इलाका धूल और धुंध से ढक जाता है। लोगों को आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई लोग लगातार खांसी और एलर्जी से भी परेशान हैं।ग्रामीणों ने खदान प्रबंधन से तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़कों पर चलने वाले भारी वाहनों से उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए वाटर स्प्रिंकलर की मरम्मत कर उसे नियमित रूप से चलाया जाए। साथ ही सड़कों को कांक्रीट से पक्का करने और कोयला साइडिंग क्षेत्र में पर्यावरण प्रबंधन योजना का सख्ती से पालन करने की भी मांग की गई है।
ऊर्जाधानी भूविस्थापित किसान कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रकाश कोर्राम ने आरोप लगाया कि खदान प्रबंधन लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। उनका कहना है कि कोल डस्ट के कारण ग्रामीण जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं, जबकि प्रबंधन सिर्फ खदान विस्तार पर ध्यान दे रहा है।ग्रामीणों ने साइडिंग के आसपास बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण और वाइट विंड ब्रेकर लगाने की भी मांग की है, ताकि धूल को गांव तक पहुंचने से रोका जा सके।स्थानीय लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।













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