1500 ग्रामीणों तक पहुंची ‘आरोग्य’ की राहत, गांव-गांव में लगा स्वास्थ्य का दरबार

सिंघीतराई/सक्ती, 1 मई

गांवों में इलाज के लिए शहर की दौड़ अब थोड़ी कम हुई है। वेदांता पावर के छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट की ‘आरोग्य परियोजना’ ने दूर-दराज़ के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाकर लोगों को बड़ी राहत दी है।

इस पहल के तहत सिंघीतराई, ओड़ेकेरा और निमोही पंचायतों में लगाए जा रहे चलित स्वास्थ्य शिविरों से अब तक करीब 1500 जरूरतमंदों को प्राथमिक इलाज मिल चुका है।मोबाइल हेल्थ यूनिट के जरिए गांव-गांव पहुंच रही मेडिकल टीम न सिर्फ मरीजों का इलाज कर रही है, बल्कि उन्हें सेहत के प्रति जागरूक भी बना रही है। यहां लोगों को मुफ्त दवाइयां दी जा रही हैं और डॉक्टर सीधे उनकी समस्याएं सुनकर सलाह दे रहे हैं।

इस काम में पीएचडी रूरल डेवलपमेंट फाउंडेशन, नई दिल्ली का सहयोग भी लिया जा रहा है।इस पहल का असर अब साफ दिखने लगा है। पहले जहां छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी ग्रामीणों को शहर जाना पड़ता था, वहीं अब गांव में ही जांच और इलाज मिल रहा है।

मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और खून की कमी जैसी आम बीमारियों की जांच भी यहीं हो रही है। खास बात ये है कि इन शिविरों के चलते झोलाछाप इलाज पर निर्भरता भी कम हुई है।

वेदांता पावर के सीईओ राजिंदर सिंह आहूजा का कहना है कि कंपनी का लक्ष्य सिर्फ बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि समाज को बेहतर जीवन देना भी है। उनके मुताबिक, “स्वस्थ भारत के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा और आरोग्य परियोजना उसी दिशा में एक कदम है।”

वहीं प्लांट के मुख्य प्रचालन अधिकारी देवेंद्र कुमार पटेल बताते हैं कि इस पहल से महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा फायदा मिला है। गांव के जनप्रतिनिधि भी मानते हैं कि इन शिविरों ने स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को काफी हद तक पूरा किया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब इलाज के लिए घंटों सफर नहीं करना पड़ता। गांव में ही डॉक्टर मिल जाते हैं, दवाइयां मिल जाती हैं और जरूरी सलाह भी। खासकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए ये सुविधा काफी मददगार साबित हो रही है।

कुल मिलाकर, ‘आरोग्य परियोजना’ ने गांवों में स्वास्थ्य को लेकर एक नई उम्मीद जगाई है जहां इलाज अब दूर नहीं, बल्कि घर के करीब पहुंच चुका है।

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