धरमजयगढ़ में SECL के खिलाफ किसानों का आक्रोश चरम पर, जनसभा से उठी हुंकार
11 सितंबर को क्लब ग्राउंड में जुटेगा किसानों का जनसैलाब, ‘एक इंच जमीन भी नहीं देंगे’ का संकल्प
धरमजयगढ़। दुर्गापुर-शाहपुर प्रस्तावित SECL कोल ब्लॉक को लेकर धरमजयगढ़ क्षेत्र में किसानों और प्रभावित ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। करीब 1,677 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्रस्तावित इस कोल ब्लॉक को लेकर ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है।

किसानों का कहना है कि कोयला खनन से उनकी कृषि भूमि, जंगल और आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।बीते दिनों इस मुद्दे को लेकर जिला कलेक्टर के सभाकक्ष में त्रिपक्षीय बैठक भी आयोजित हुई थी। हालांकि, किसानों के मुताबिक बैठक से कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। इसके बाद आंदोलन को गांव-गांव तक विस्तार देने की रणनीति तैयार की गई।इसी क्रम में 26 अगस्त को ग्राम पंचायत दुर्गापुर बस्ती में बड़ी किसान सभा हुई थी। यहां आदिवासी किसानों ने अपनी परंपरा और रीति-रिवाज के अनुसार नारियल, अगरबत्ती और चावल से देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया था।
किसानों ने दो टूक कहा था—“एक इंच जमीन भी नहीं देंगे”धरमजयगढ़ कॉलोनी में हुई अहम बैठकइसी अभियान के तहत 3 सितंबर को धरमजयगढ़ कॉलोनी में किसानों और प्रभावित ग्रामीणों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में SECL की प्रस्तावित गतिविधियों का विरोध जारी रखने और क्षेत्र में होने वाले सर्वे कार्य का भी पुरजोर विरोध करने की बात कही गई।
बैठक में किसान दिलीप मिश्रा ने कहा कि क्षेत्र के किसान वर्षों से खेती पर निर्भर हैं। यहां उत्पादित तरबूज और मक्का जैसी फसलों का दूसरे जिलों और राज्यों तक व्यापार होता है। ऐसे में कोयला खनन शुरू होने से कृषि भूमि और खेती पर असर पड़ने की आशंका है, जिससे क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
किसानों का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ जमीन बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती, जंगल, आजीविका और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ी है। ग्रामीणों ने अपनी बात शासन-प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री स्तर तक और जरूरत पड़ने पर न्यायालय तक पहुंचाने की बात कही है।

11 सितंबर को क्लब ग्राउंड में बड़ी रैली और आमसभाबैठक में आगामी 11 सितंबर को धरमजयगढ़ क्लब ग्राउंड में विशाल रैली और आमसभा आयोजित करने का निर्णय लिया गया। किसानों का दावा है कि इस सभा के जरिए वे अपनी एकजुटता और विरोध की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाएंगे।आंदोलन के खर्च को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। किसानों के बीच सहयोग के लिए एक डिब्बा रखा गया, जिसमें लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार स्वेच्छा से आर्थिक सहयोग दिया। इस दौरान किसानों की एकजुटता और आंदोलन के प्रति उनका संकल्प साफ नजर आया।अब सबकी नजरें 11 सितंबर पर टिकी हैं।
गांव-गांव हो रही बैठकों और लगातार बढ़ते विरोध के बीच क्लब ग्राउंड में होने वाली रैली और आमसभा कितनी बड़ी होती है और किसानों की यह आवाज शासन-प्रशासन तक किस रूप में पहुंचती है, यह देखने वाली बात होगी।धरमजयगढ़ से किसानों की हुंकार अब गांव की चौपाल से निकलकर बड़े आंदोलन की ओर बढ़ती नजर आ रही है।







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