खेत से डेयरी तक बदलेगी तस्वीर! 10 गांवों के 274 किसानों को पशुधन स्वास्थ्य का स्मार्ट प्रशिक्षण, महिलाओं ने भी बढ़ाया कदम

141 महिलाओं ने संभाली पशुपालन की कमान, 10 गांवों के 274 किसानों को मिला वैज्ञानिक प्रशिक्षण

अदाणी फाउंडेशन की पहल से पशुधन स्वास्थ्य और डेयरी विकास को बढ़ावा, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक से 47 मादा बछड़ों का जन्म

रायगढ़, 19 सितंबर 2026। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में पशुपालन की अहम भूमिका है और इसी दिशा में रायगढ़ में किसानों को वैज्ञानिक पशुपालन से जोड़ने की पहल की गई है। अदाणी पावर लिमिटेड की सामाजिक सरोकार इकाई अदाणी फाउंडेशन के मार्गदर्शन और पशुपालन क्षेत्र में तकनीकी सहयोग देने वाली संस्था बाइफ (BAIF) के सहयोग से 10 गांवों में पांच दिवसीय पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में कुल 274 किसानों ने हिस्सा लिया। खास बात यह रही कि पुरुषों से ज्यादा महिला किसानों की भागीदारी दर्ज की गई।4 से 8 सितंबर तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 133 पुरुष और 141 महिला किसानों ने पशुधन प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं।

महिला किसानों की यह भागीदारी ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को लेकर महिलाओं की बढ़ती सक्रिय भूमिका को भी सामने लाती है।

10 गांवों में अलग-अलग सत्रों के जरिए प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत 4 सितंबर को ग्राम टपरदा से हुई। इसके बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार प्रत्येक दिन दो गांवों में प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। 4 सितंबर को टपरदा और कथली, 5 सितंबर को अमलीभौना और रनभाठा, 6 सितंबर को पुसल्दा और शंकरपाली, 7 सितंबर को सुपा और तिलगी तथा 8 सितंबर को सरवानी और अमलीपाली में पशुपालकों को प्रशिक्षण दिया गया।

विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने किसानों को केवल पशुओं की देखभाल तक सीमित जानकारी नहीं दी, बल्कि पशुपालन को ज्यादा productive और व्यवस्थित बनाने से जुड़े कई practical पहलुओं पर भी चर्चा की। किसानों को उन्नत नस्ल के चयन, संतुलित पशु आहार, हरे चारे की उपलब्धता, पशु आवास की साफ-सफाई और बेहतर management के बारे में जानकारी दी गई।इसके साथ ही समय पर टीकाकरण और कृमिनाशन, स्वस्थ एवं बीमार पशुओं की पहचान तथा विभिन्न रोगों की रोकथाम के उपाय भी समझाए गए। पशुधन से मिलने वाले उत्पादों के बेहतर marketing और उन्हें उचित कीमत पर बेचने के तरीकों की जानकारी भी किसानों के साथ साझा की गई।

वैज्ञानिक तकनीक से बढ़ रही मादा बछड़ों की संख्या

पशुधन विकास के क्षेत्र में कृत्रिम गर्भाधान को भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। अदाणी फाउंडेशन के अनुसार अप्रैल 2026 से अब तक क्षेत्र में कुल 341 कृत्रिम गर्भाधान किए जा चुके हैं। इनमें 229 पारंपरिक विधि से और 113 सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक के जरिए किए गए।इन प्रयासों के बाद अब तक कुल 93 उन्नत नस्ल के बछड़ों का जन्म हुआ है। सेक्स-सॉर्टेड सीमेन तकनीक से जन्मे बछड़ों में 47 मादा और 8 नर बछड़े शामिल हैं। वहीं पारंपरिक विधि से जन्मे बछड़ों में 14 मादा और 19 नर बछड़े दर्ज किए गए हैं।फाउंडेशन के अनुसार मादा बछड़ों की संख्या में बढ़ोतरी भविष्य में डेयरी गतिविधियों और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने में उपयोगी साबित हो सकती है। इससे पशुपालकों के लिए बेहतर नस्ल के पशुधन को विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।

22.6 एकड़ में विकसित किए गए नेपियर घास के प्लॉट

पशुओं को पूरे साल पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने के लिए चारा प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से 22.6 एकड़ क्षेत्र में उन्नत नेपियर घास के प्रदर्शन प्लॉट विकसित किए गए हैं। इन demonstration plots के माध्यम से स्थानीय पशुपालकों को पौष्टिक हरा चारा तैयार करने और उसके उपयोग की जानकारी मिल रही है।अमलीभौना गांव के पशुपालक लक्ष्मी निषाद ने अदाणी फाउंडेशन की पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रशिक्षण और निःशुल्क पशु चिकित्सा शिविरों से गांव के पशुपालकों को काफी लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार के साथ दुग्ध उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है और नस्ल सुधार की दिशा में भी काम आगे बढ़ रहा है।

पशुपालन के साथ आजीविका और महिला सहभागिता पर फोकस

अदाणी फाउंडेशन की ओर से संचालित इस पहल में पशुओं के स्वास्थ्य और नस्ल सुधार के साथ किसानों की आय से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है। प्रशिक्षण, कृत्रिम गर्भाधान, चारा प्रबंधन और पशु चिकित्सा सुविधाओं जैसी गतिविधियों के जरिए ग्रामीण पशुपालकों को वैज्ञानिक तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।कार्यक्रम में महिलाओं की पुरुषों से अधिक भागीदारी इस पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू रही।

274 किसानों में 141 महिलाओं की भागीदारी यह दिखाती है कि ग्रामीण परिवारों में पशुपालन से जुड़ी गतिविधियों में महिलाएं भी सक्रिय रूप से प्रशिक्षण और नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे आ रही हैं।

अदाणी फाउंडेशन के अनुसार पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन, नस्ल सुधार, पौष्टिक चारा और वैज्ञानिक पशुपालन को एक साथ बढ़ावा देकर क्षेत्र में सतत ग्रामीण आजीविका और डेयरी विकास को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

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