जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक बड़ी सफलता सामने आई है। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े 108 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है, जिनमें 44 महिला कैडर भी शामिल हैं। इन सभी माओवादियों पर कुल 3 करोड़ 29 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
जगदलपुर स्थित शौर्य भवन, पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर लालबाग में आयोजित “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत यह आत्मसमर्पण कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारी, समाज के प्रतिनिधि और आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के परिवारजन भी मौजूद रहे।
आत्मसमर्पण करने वालों में माओवादी संगठन के कई महत्वपूर्ण पदाधिकारी शामिल हैं। इनमें 5 डिवीजनल कमेटी सदस्य (DVCM), 2 PLGA कंपनी स्तर के पदाधिकारी, 15 प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य (PPCM), 21 एरिया कमेटी सदस्य (ACM) और 63 पार्टी सदस्य (PM) शामिल हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सुरक्षा बलों को आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों से मिली जानकारी और खुफिया इनपुट के आधार पर बड़ी कार्रवाई करते हुए विभिन्न स्थानों से AK-47, INSAS, LMG, BGL सहित कुल 101 घातक हथियार बरामद किए गए हैं। बरामद हथियारों में 07 AK-47, 10 INSAS रायफल, 05 SLR, 04 LMG, 20 .303 रायफल, 11 BGL लांचर समेत कई अन्य हथियार शामिल हैं।
इसके अलावा नक्सलियों द्वारा बनाए गए डंप से 3 करोड़ 61 लाख रुपये की नगदी और करीब 1 किलोग्राम सोना (लगभग 1.64 करोड़ रुपये मूल्य) भी बरामद किया गया है, जिसे नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में एक ही स्थान से मिली सबसे बड़ी नकदी बरामदगी माना जा रहा है।
जिला-वार कार्रवाई में नारायणपुर से 49, बस्तर से 24, सुकमा से 12, बीजापुर से 9, दंतेवाड़ा से 5 और कांकेर से 2 हथियार बरामद किए गए। इन सभी हथियारों और बरामद सामग्री को कार्यक्रम के दौरान जगदलपुर में प्रदर्शित भी किया गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल का उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले युवाओं को पुनर्वास, सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत उन्हें आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि इस पहल से प्रभावित होकर पिछले 26 महीनों में छत्तीसगढ़ में 2714 माओवादी कैडर मुख्यधारा में लौट चुके हैं, जबकि 1 जनवरी 2024 से 9 मार्च 2026 के बीच बस्तर संभाग में ही 2625 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
पुलिस का कहना है कि इस सामूहिक आत्मसमर्पण से माओवादी संगठन की संरचना और गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है तथा इससे क्षेत्र में सुरक्षा और विकास कार्यों को और गति मिलने की उम्मीद है।

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