गौरेला में ‘दारुल कजा’ विवाद: ताला तोड़कर कब्जे का आरोप, पुलिस ने न्यायालय जाने की दी सलाह

गौरेला में ‘दारुल कजा’ विवाद: ताला तोड़कर कब्जे का आरोप, पुलिस ने न्यायालय जाने की दी सलाह

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही।जिले के गौरेला स्थित जामा मस्जिद परिसर में संचालित ‘दारुल कजा’ (इस्लामिक न्यायालय/परामर्श केंद्र) को लेकर विवाद सामने आया है। कार्यालय का ताला तोड़कर नया ताला लगाने और अंदर रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों व संपत्तियों पर कब्जा करने के आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।इस संबंध में जामा मस्जिद पेण्ड्रा एवं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े सदर मो. शहाबुद्दीन (48) ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बिना किसी पूर्व सूचना के कार्यालय का ताला तोड़ा गया और अंदर रखे सामान को कब्जे में ले लिया गया।

क्या है पूरा मामला शिकायतकर्ता के अनुसार, विवाद जामा मस्जिद गौरेला से लगे वक्फ बोर्ड की संपत्ति वाले एक मकान को लेकर है, जिसे पूर्व मुतवल्ली मो. मुख्तार द्वारा ‘दारुल कजा’ संचालन और काजी के निवास हेतु किराए पर दिया गया था। वर्ष 2019 में काजी मोहम्मद जुलकरनैन को काजी-ए-शरीयत नियुक्त किया गया था।आरोप है कि वर्तमान मुतवल्ली मो. नफीस और उनके सहयोगियों द्वारा काजी जुलकरनैन पर लगातार दबाव बनाया गया और अभद्र व्यवहार किया गया। इससे परेशान होकर काजी 2 अगस्त 2025 को अपने गृह ग्राम चतरा (झारखंड) लौट गए।इसके बाद नए काजी की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हुई और 15 अप्रैल 2026 को शपथ ग्रहण प्रस्तावित था। इसी बीच 13 अप्रैल 2026 को जब शिकायतकर्ता कार्यालय की साफ-सफाई के लिए पहुंचे, तो वहां का मुख्य बोर्ड गायब मिला और ताला टूटा हुआ पाया गया। आरोप है कि संबंधित पक्ष ने नया ताला लगाकर कार्यालय को बंद कर दिया है, जिसके अंदर अभी भी गोपनीय दस्तावेज, धार्मिक पुस्तकें, फर्नीचर, कंप्यूटर, प्रिंटर सहित अन्य सामान रखा हुआ है।पुलिस ने क्या कहापुलिस ने शिकायत प्राप्त कर मामले की जांच की, लेकिन इसे वक्फ बोर्ड के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा और ‘अहस्तक्षेप योग्य’ (Non-Cognizable) मामला बताया है।

पुलिस ने फैना क्रमांक 37/26 के तहत अदम दस्तंदाजी (NCR) दर्ज कर शिकायतकर्ता को न्यायालय की शरण लेने की सलाह दी है पुलिस के रुख के बाद यह मामला अब न्यायालय या वक्फ ट्रिब्यूनल में जाने की संभावना है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए स्थानीय स्तर पर समाधान की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं, लेकिन फिलहाल मामला कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।

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