लैलूंगा MCH में नवजात की मौत, 5 दिन बाद भी न्याय का इंतजार

लैलूंगा MCH में नवजात की मौत से उठे सवाल, 5 दिन बाद भी जांच और न्याय का इंतजार

प्रसव व्यवस्था और ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ को लेकर परिजनों ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

लैलूंगा। लैलूंगा MCH में प्रसव के दौरान नवजात की मौत का मामला सामने आने के बाद अस्पताल की प्रसव व्यवस्था और उस समय उपलब्ध चिकित्सकीय स्टाफ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। घटना के पांच दिन बाद भी पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने और जांच के आधार पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।

परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की मौजूदगी के बिना नर्स द्वारा प्रसव कराया गया, जिसके बाद नवजात की मौत हो गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति मेडिकल रिकॉर्ड व विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

जानकारी के अनुसार, वीना सिदार, पति रामरतन सिदार, निवासी ऐंकड़ा को प्रसव पीड़ा के दौरान पहले लामडांडा अस्पताल ले जाया गया था। परिजनों के अनुसार, वहां महिला की स्थिति को देखते हुए आवश्यक व्यवस्था उपलब्ध नहीं होने की बात कहते हुए उसे लैलूंगा MCH रेफर किया गया।परिजनों का कहना है कि लैलूंगा MCH पहुंचने के बाद प्रसव के दौरान डॉक्टर की अनुपस्थिति में नर्स ने प्रसव कराया। इसके बाद नवजात बेटे की मौत हो गई। परिवार ने मांग की है कि घटना के समय की ड्यूटी व्यवस्था, डॉक्टर एवं नर्सों की उपलब्धता, उपचार की प्रक्रिया, मेडिकल रिकॉर्ड और नवजात की मौत के चिकित्सकीय कारण की जांच कर पूरी स्थिति स्पष्ट की जाए।

एक दिन में 5 प्रसव का दावा, रिकॉर्ड से हो पुष्टि

परिजनों के अनुसार, घटना वाले दिन अस्पताल में कुल पांच प्रसव हुए थे। इनमें एक ऑपरेशन, एक प्रसव डॉक्टर वर्तिका की मौजूदगी में तथा तीन प्रसव नर्सों द्वारा कराए जाने का दावा किया गया है। इन दावों की पुष्टि अस्पताल के ड्यूटी चार्ट और आधिकारिक रिकॉर्ड से होना आवश्यक है।

बच्चे को खोने का दर्द, सत्यवती सिदार ने उठाए व्यवस्था पर सवाल

परिवार की ओर से सत्यवती सिदार ने कहा कि बच्चे को खोने का दर्द वही मां समझ सकती है, जिसने उसे जन्म दिया हो। उनका कहना है कि अस्पताल में व्यवस्था और सिस्टम होने के बावजूद यदि परिवार को आवश्यक चिकित्सा सुविधा और चिकित्सकीय निगरानी समय पर मिली या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि घटना के समय ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों की भूमिका, प्रसव की पूरी प्रक्रिया और उपलब्ध चिकित्सा व्यवस्था की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए।

यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

रामरतन सिदार बोले—बिना जांच किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे

नवजात के पिता रामरतन सिदार ने कहा कि परिवार की मांग किसी को बिना जांच के दोषी ठहराने की नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड के आधार पर यह स्पष्ट होना चाहिए कि प्रसव के समय कौन-कौन कर्मचारी ड्यूटी पर थे, महिला को क्या उपचार दिया गया और नवजात की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था।परिवार ने मांग की है कि यदि जांच में किसी स्तर पर जिम्मेदारी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए और पीड़ित महिला को शासन की पात्रता के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए।

5 दिन बाद भी परिवार को कार्रवाई का इंतजार

परिजनों का कहना है कि घटना के पांच दिन बाद भी उन्हें मामले की जांच और सहायता को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। परिवार ने प्रशासन से शीघ्र जांच कर रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।परिवार ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती है तो वे धरना और भूख हड़ताल जैसे लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी मांग प्रशासन के समक्ष रखेंगे।

इस मामले में किसी व्यक्ति को जांच से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। नवजात की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण तथा किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह मेडिकल रिकॉर्ड, ड्यूटी चार्ट और संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

अब परिवार की मांग है कि मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो, तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाए और पात्रता के अनुसार पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराई जाए।

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