
20 मीटर के दायरे में दो पुलिया! निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, बांस-बल्ली के सहारे सेंटरिंग का आरोप
गौरेला/ठेंगाडांड। गौरेला थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत ठेंगाडांड के आश्रित क्षेत्र भैनामुड़ा में पिपरखुटी से बढ़ावानडांड मार्ग पर चल रहे पुलिया निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास कार्य के नाम पर निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों से समझौता किया जा रहा है। खास बात यह है कि महज करीब 20 मीटर के दायरे में दो पुलिया निर्माण कराया जा रहा है। एक पुलिया का काम लगभग पूरा बताया जा रहा है, जबकि दूसरी पुलिया का निर्माण फिलहाल जारी है।

निर्माण स्थल की तस्वीरों में दिखाई दे रही तकनीकी खामियां मौके से सामने आई तस्वीरों के आधार पर लगभग पूर्ण हो चुकी पुलिया की साइड वॉल और बाहरी हिस्सों में कई स्थानों पर कंक्रीट की फिनिशिंग कमजोर और हनीकॉम्बिंग जैसी स्थिति दिखाई दे रही है। कुछ जगहों पर गिट्टियां बाहर नजर आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण में मानकों का पालन नहीं हुआ है तो आने वाले बरसात के मौसम में इसकी मजबूती पर असर पड़ सकता है।

सेंटरिंग को लेकर भी सवाल पुलिया स्लैब की ढलाई के लिए इस्तेमाल की गई सेंटरिंग को लेकर भी ग्रामीणों ने आपत्ति जताई है। आरोप है कि मजबूत लोहे के सपोर्ट की जगह बांस और लकड़ियों के सहारे सेंटरिंग की गई। ऐसे में निर्माण के दौरान लेवल और स्ट्रक्चर की मजबूती को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इसकी वास्तविक तकनीकी स्थिति की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।

दूसरी पुलिया की गहरी खुदाई में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल करीब 20 मीटर की दूरी पर बन रही दूसरी पुलिया के लिए गहरी खुदाई की गई है। ग्रामीणों के मुताबिक खुदाई वाले हिस्से के किनारों पर मिट्टी धंसने से बचाव के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नजर नहीं आ रहे हैं। इससे निर्माणाधीन स्ट्रक्चर की नींव और मौके पर काम कर रहे श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

CIB बोर्ड नहीं होने से पारदर्शिता पर सवाल ग्रामीणों के अनुसार निर्माण स्थल पर Citizen Information Board (CIB) भी नजर नहीं आ रहा है। ऐसे बोर्ड पर आमतौर पर योजना का नाम, स्वीकृत राशि, निर्माण एजेंसी, कार्य की अवधि और संबंधित अधिकारियों की जानकारी रहती है। बोर्ड नहीं होने की स्थिति में ग्रामीणों के लिए योजना से जुड़ी जानकारी हासिल करना मुश्किल हो जाता है।

ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच वन क्षेत्र से जुड़े इस मार्ग पर बारिश के दौरान नालों में तेज पानी आने की बात ग्रामीणों ने कही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण में वास्तव में गुणवत्ता से समझौता हुआ है तो भविष्य में पुलिया को नुकसान पहुंच सकता है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मौके पर तकनीकी जांच कराने, निर्माण की गुणवत्ता की जांच करने और आवश्यक होने पर स्लैब का Core Test कराने की मांग की है। साथ ही निर्माण कार्य में यदि किसी स्तर पर तकनीकी या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी की गई है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर Ground Reality की जांच करता है या तस्वीरों और ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ता रहता है।











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