कांग्रेस का खाद संकट प्रदर्शन: किसानों ने तहसील पहुँचकर सुनाई अपनी पीड़ा
खाद की कमी का संकट इन दिनों किसानों की सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। खेतों में बोआई का समय है, लेकिन समितियों और बाजारों में खाद की उपलब्धता न होने से किसान बुरी तरह परेशान हैं। यही कारण है कि आज तहसील मुख्यालय किसानों की भीड़ से भर गया। कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में किसान यहाँ इकट्ठा हुए और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
किसानों का दर्द – “फसल बर्बाद हो जाएगी”किसानों का कहना है कि अगर समय पर खाद नहीं मिली तो फसल की पैदावार पर गंभीर असर पड़ेगा। कई किसानों ने अपनी मजबूरी जताते हुए कहा कि उन्होंने कर्ज लेकर खेती शुरू की है। बीज, मजदूरी और सिंचाई पर खर्च करने के बाद अब अगर खाद न मिले तो उनका पूरा परिश्रम बेकार हो जाएगा।
एक किसान की आंखों में आंसू छलकते हुए दिखे। उन्होंने कहा – “हम सुबह से शाम तक समितियों के चक्कर काटते हैं, लेकिन हाथ खाली रहता है। अधिकारी कहते हैं कि खाद नहीं आया। जबकि कुछ चुनिंदा लोगों को वही खाद मिल रहा है। हमारी हालत समझने वाला कोई नहीं।”
आरोप – “भेदभाव से बांटी जा रही खाद”प्रदर्शन कर रहे किसानों ने गंभीर आरोप लगाए कि खाद वितरण में भी राजनीति हो रही है। किसानों ने कहा कि समितियों के प्रभंधक खुले तौर पर भाजपा से जुड़े लोगों को ही खाद उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि आम किसानों को मना कर दिया जाता है। इससे गांवों में नाराज़गी और तनाव का माहौल बन गया है।
कांग्रेस का आरोप – “सरकार किसान विरोधी”प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों को लगातार उपेक्षित कर रही है। उनका कहना था कि जब-जब किसान संकट में होता है, कांग्रेस उसके साथ खड़ी रहती है। एक कांग्रेस नेता ने कहा – “किसान खाद के लिए दर-दर भटक रहा है और सरकार कह रही है कि पर्याप्त स्टॉक है। यह सरकार किसानों की पीड़ा से आंख मूंदे हुए है।”
तहसील परिसर में गूंजे नारे
प्रदर्शन के दौरान तहसील परिसर में “किसान विरोधी सरकार मुर्दाबाद” और “खाद दो, फसल बचाओ” जैसे नारे गूंजते रहे। महिलाओं की संख्या भी बड़ी थी, जो अपने पति और बेटों के साथ यहाँ आई थीं। भीड़ में शामिल हर व्यक्ति के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही थी।किसानों की मजबूरी – “कर्ज़ और भूख दोनों का बोझ”गांवों से आए किसानों ने बताया कि खाद की कमी से सिर्फ खेती ही प्रभावित नहीं हो रही, बल्कि उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।
एक महिला किसान ने कहा – “हमारे घर में दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो गया है। खेत में मेहनत कर भी लें, लेकिन बिना खाद फसल खड़ी नहीं हो सकती।”कई किसानों ने बताया कि वे महंगे दामों पर बाजार से खाद खरीदने को मजबूर हैं। जहां समितियों में 1200 रुपये की बोरी खाद मिलनी चाहिए, वहीं खुले बाजार में यह 2000 रुपये तक बिक रही है। छोटे किसान इन ऊंचे दामों पर खाद खरीदने की स्थिति में नहीं हैं।
ज्ञापन सौंपा, मिला आश्वासन लंबे प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं और किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। इसमें तुरंत खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
एसडीएम ने ज्ञापन लेते हुए कहा कि किसानों की समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा और उच्च अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट भेजी जाएगी।

आंदोलन का असर किसानों को अभी सिर्फ आश्वासन ही मिला है, लेकिन उनकी पीड़ा और गुस्से ने साफ कर दिया है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा हो सकता है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही खाद की आपूर्ति नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर और उग्र आंदोलन करेंगे।—
📌 निचोड़:किसानों का दर्द सिर्फ खेत की मिट्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके परिवारों की रोटी और भविष्य से जुड़ा हुआ है। अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में खाद का यह संकट एक बड़े किसान आंदोलन का रूप ले सकता है।













Leave a Reply