खरसिया से उठी किसानों की हुंकार खाद संकट ने भड़काई बगावत – उमेश पटेल की अगुवाई में हजारों किसानों ने तहसील का घेराव, प्रशासन को सौंपा अल्टीमेटम
खरसिया, 04 सितंबर 2025।धान बोने के crucial मौसम में खाद की किल्लत किसानों पर पहाड़ बनकर टूटी है। डीएपी और यूरिया की अनुपलब्धता ने किसान परिवारों को हलाकान कर दिया है। इस संकट ने गुरुवार को खरसिया की सड़कों को ज्वाला में बदल दिया। कांग्रेस विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री उमेश पटेल के नेतृत्व में किसानों का सैलाब उमड़ा, जिसने तहसील कार्यालय को घेरकर सरकार और प्रशासन को खुला अल्टीमेटम सौंपा ।
विधायक उमेश पटेल ने ऐलान किया –“अगर पांच दिन के भीतर खाद की आपूर्ति नहीं सुधरी, तो यह संघर्ष सिर्फ खरसिया में सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे प्रदेश में आंदोलन का रूप लेगा। किसानों की आवाज़ को अब कोई दबा नहीं पाएगा।”-
रैली से घेराव तक – किसानों का सैलाब
गुरुवार सुबह मदनपुर कांग्रेस कार्यालय से रैली की शुरुआत हुई। देखते ही देखते हजारों किसान, महिलाएं और नौजवान शामिल हो गए। शहर की गलियों में नारों की गूंज सुनाई दी –“भाजपा हटाओ – प्रदेश बचाओ”“जय जवान, जय किसान”“किसानों के सम्मान में उमेश पटेल मैदान में”“कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद”यह रैली सीधे खरसिया तहसील कार्यालय पहुंची, जहां प्रशासन ने पहले से सुरक्षा के सख्त इंतज़ाम किए थे।
पुलिस की सख़्त लेकिन शांत भूमिका
तहसील कार्यालय पर हजारों की भीड़ जुटने के बावजूद माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। इसकी वजह थी पुलिस की मुस्तैद और संतुलित भूमिका।थाना प्रभारी राजेश जांगड़े चौकी प्रभारी निरीक्षक अमित तिवारी अपने पूरे स्टाफ के साथ सुरक्षा व्यवस्था संभाले रहे।भीड़ का दबाव भले भारी था, लेकिन पुलिस का संयम और सकारात्मक रवैया पूरे आंदोलन में झलकता रहा।
किसान अपनी आवाज़ बुलंद कर सके और प्रशासन तक बात पहुँची, बिना किसी टकराव या हिंसा के।
प्रशासन सामने आया – भरोसा दिलाया भीड़ के बीच एसडीएम प्रवीण तिवारी ने किसानों का ज्ञापन लिया। उनके साथ तहसीलदार मोनल साय और नायब तहसीलदार काजल अग्रवाल भी मौजूद थे।एसडीएम ने शांति और धैर्य से किसानों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा –“प्रशासन किसानों की परेशानी को गंभीरता से देख रहा है। खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।”उनकी बातों ने कुछ हद तक किसानों को भरोसा दिया, लेकिन नाराज़गी का गुबार अभी भी हवा में साफ झलकता रहा।-
–उमेश पटेल का तीखा प्रहार
अपने संबोधन में उमेश पटेल ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा –“समिति प्रबंधकों द्वारा खाद वितरण में खुली मनमानी हो रही है। बड़े किसानों को आसानी से खाद मिलता है, जबकि छोटे और गरीब किसान लाइन में भटकते हैं।”“यह संकट प्राकृतिक नहीं, बल्कि जानबूझकर रचा गया है ताकि धान उत्पादन घटे और खरीदी का बोझ सरकार से कम हो।”“पिछली खरीदी में किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल में धान लिया गया और बाद में 1900 रुपये में नीलाम कर दिया गया। यह किसानों के साथ धोखा और अपमान है।”उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अगर पांच दिनों में हालात नहीं सुधरे, तो खरसिया का यह आंदोलन प्रदेशव्यापी होगा और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार और प्रशासन की होगी।
किसानों की व्यथा – खेतों में सूखा, दिलों में गुस्सा धरना स्थल पर आए किसानों ने भी खुलकर अपनी पीड़ा सुनाई।“धान की रोपाई अधूरी है, पौधे सूख रहे हैं।”“समय पर खाद न मिला, तो मेहनत और उम्मीद दोनों चौपट हो जाएंगे।”“हम लाइन में खड़े-खड़े थक गए, लेकिन बोरी खाली ही रही।”इन आवाज़ों में सिर्फ गुस्सा नहीं था, बल्कि बेबसी भी थी। किसानों की आंखों में साफ लिखा था – अगर फसल बर्बाद हुई तो सिर्फ खेत नहीं, परिवार भी उजड़ जाएगा।
आंदोलन से निकला संदेश
खरसिया का यह आंदोलन सिर्फ खाद की कमी के खिलाफ गुस्सा नहीं है, बल्कि किसानों की एकजुटता का शक्तिशाली प्रदर्शन है।
यहां दो तस्वीरें साफ दिखीं –
1. किसान, जो अपने हक़ के लिए लड़ने को तैयार हैं।
2. पुलिस और प्रशासन, जिन्होंने शांति और संतुलन से प्रदर्शन को दिशा दी।
आगे क्या?
अब पूरा प्रदेश देख रहा है कि प्रशासन और सरकार किसानों की मांगों पर कितना गंभीर कदम उठाती है। अगर आपूर्ति सुचारु हुई, तो किसानों को कुछ राहत मिलेगी। लेकिन अगर हालात वैसे ही बने रहे, तो खरसिया से उठी यह चिंगारी जल्द ही राजधानी रायपुर तक लपटें भेज सकती है।
👉 सवाल साफ है – क्या सरकार किसानों की आवाज़ सुनेगी, या किसान आंदोलन की लपटों से पूरा प्रदेश गरम होगा?

















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