अदाणी फाउंडेशन की एसएलडी परियोजना ने खोले आर्थिक आत्मनिर्भरता के मार्ग

₹5 लाख से अधिक आय — मशरूम उत्पादन ने ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण को दिया नया आयाम

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अदाणी फाउंडेशन की एसएलडी परियोजना ने खोले आर्थिक आत्मनिर्भरता के मार्ग

रायगढ़, बड़े भंडार, 06 फ़रवरी 2026:अदाणी फाउंडेशन, रायगढ़ द्वारा संचालित सतत आजीविका विकास (एसएलडी) परियोजना ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन रही है। इस परियोजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने मशरूम उत्पादन को आय का साधन बनाते हुए अब तक ₹5,51,000 लाख से अधिक की आय अर्जित की है। यह उपलब्धि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन में स्थायी परिवर्तन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।परियोजना के अंतर्गत 12 गाँवों की 100 महिलाओं को ऑयस्टर और पैडी स्ट्रॉ मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के बाद उन्हें निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन, बीज, कच्चा माल तथा विपणन सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसका परिणाम यह हुआ कि महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे नियमित एवं स्थिर आय अर्जित कर पा रही हैं। केवल दो महीनों में 1000 किलो से अधिक मशरूम का उत्पादन किया गया, जिसकी बाजार कीमत लगभग ₹1.60 लाख रही है। उत्पादन लगातार जारी है, जिससे समूहों की आय में और वृद्धि की संभावना है।

मशरूम उत्पादन में आधुनिक तकनीक जैसे बाँस से बने ढाँचे और फॉगर तकनीक का उपयोग महिलाओं की दक्षता बढ़ा रहा है। विज्ञान-आधारित खेती को अपनाने से युवतियों और महिलाओं में आधुनिक कृषि पद्धतियों की समझ विकसित हुई है, जिससे गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में सुधार आया है।इसके साथ ही यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी को भी बढ़ावा दे रही है। बॉक्स और कृषि अपशिष्ट जैसे पुआल के उपयोग से उत्पादन लागत और कार्बन फुटप्रिंट में कमी आई है। उत्पादन के बाद बचा सब्सट्रेट जैविक खाद के रूप में खेतों में उपयोग हो रहा है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो रहा है।

मशरूम की कम शेल्फ लाइफ को देखते हुए महिलाओं को प्रसंस्कृत उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। सूखे मशरूम, बड़ी, पापड़ और अचार जैसे उत्पाद स्थानीय दुकानों और सुपरमार्केट में मांग प्राप्त कर रहे हैं। इससे महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय स्रोत बने हैं और उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत हुई है।

अदाणी फाउंडेशन भविष्य में इस पहल को और विस्तारित करते हुए स्वयं सहायता समूहों के लिए एक मॉडल सेंटर तथा स्पॉन उत्पादन यूनिट स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रहा है। इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी, बाहरी निर्भरता घटेगी और स्थानीय बाजारों में नियमित आपूर्ति सुनिश्चित होगी।

रायगढ़ के 45 गाँवों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और सामुदायिक विकास के कार्यक्रमों के साथ यह मशरूम उत्पादन परियोजना ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के जीवन में आय वृद्धि, पोषण सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के नए अवसर लेकर आई है।

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