20 लाख के चेक डैम निर्माण पर उठे सवाल, गुणवत्ता और प्रक्रिया पर लगे आरोप

20 लाख के चेक डैम निर्माण पर उठे सवाल, गुणवत्ता और प्रक्रिया पर लगे आरोप

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही | विशेष रिपोर्ट

मरवाही विकासखंड के ग्राम पंचायत नाका में ‘बोदुरा खाड़ी नाला’ पर निर्मित कंक्रीट चेक डैम को लेकर स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। करीब 19.91 लाख रुपये की लागत से बने इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं

एक महीने में पूरा निर्माण, तकनीकी मानकों पर सवाल

ग्रामीणों के अनुसार, यह निर्माण कार्य 17 मार्च 2026 से शुरू होकर 18 अप्रैल 2026 तक महज एक महीने में पूरा कर लिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी लागत वाले कंक्रीट कार्य में आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाएं, विशेषकर क्योरिंग (तराई), पर्याप्त रूप से नहीं अपनाई गईं, जिससे इसकी मजबूती पर संदेह जताया जा रहा है।

गुणवत्ता को लेकर शिकायतें

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में उपयोग की गई सामग्री और कार्य की गुणवत्ता अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं दिख रही है। कुछ स्थानों पर कंक्रीट के उखड़ने और सतह असमान होने जैसी शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि तेज बहाव या बारिश के दौरान यह संरचना प्रभावित हो सकती है।

ठेका और हितों के टकराव पर चर्चा

जानकारी के अनुसार, इस निर्माण कार्य को ठेकेदार मुरारी रैदास द्वारा कराया गया, जो क्षेत्रीय जिला पंचायत सदस्य राधा मुरारी लाल रैदास के पति बताए जा रहे हैं। साथ ही, उनके पत्रकारिता से जुड़े होने की भी चर्चा है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर किसी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासनिक निगरानी पर प्रश्न

ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान संबंधित विभागीय अधिकारियों द्वारा गुणवत्ता की पर्याप्त निगरानी नहीं की गई। हालांकि, इस संबंध में अभी तक विभागीय अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

जांच की मांग

स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों के एक वर्ग ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है, ताकि निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

पक्ष जानने का प्रयास

इस संबंध में ठेकेदार एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। पक्ष मिलने पर इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

ग्राम पंचायत नाका का यह चेक डैम अब गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवालों के केंद्र में आ गया है। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या जांच के बाद सच्चाई सामने आ पाती है।

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