🟦 🔷 DNA एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन व परीक्षण पर एक दिवसीय ऑनलाईन कार्यशाला का सफल आयोजन
बिलासपुर, 05 मई 2026।बिलासपुर रेंज पुलिस द्वारा अपराध एवं मर्ग विवेचना में DNA एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन एवं परीक्षण विषय पर एक दिवसीय रेंज स्तरीय ऑनलाईन कार्यशाला का सफल आयोजन पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय, बिलासपुर में किया गया।
कार्यशाला का आयोजन पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल तथा उप पुलिस अधीक्षक, आईजी कार्यालय बिलासपुर रेंज विवेक शर्मा उपस्थित रहे।
कार्यशाला का शुभारंभ पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग द्वारा किया गया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि हत्या, हत्या के प्रयास एवं बलात्कार जैसे गंभीर अपराधों की विवेचना में जप्त प्रदर्शों का वैज्ञानिक ढंग से DNA एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने बताया कि साक्ष्य संकलन के दौरान की गई छोटी से छोटी त्रुटि भी परीक्षण रिपोर्ट को प्रभावित कर सकती है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि न्यायालयिक DNA आधुनिक न्याय प्रणाली का “गोल्ड स्टैंडर्ड” है, जो दोषियों को सजा दिलाने के साथ-साथ निर्दोष व्यक्तियों को भी झूठे आरोपों से बचाने में सहायक है।

कार्यशाला में क्षेत्रीय विज्ञान प्रयोगशाला बिलासपुर की वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रियंका लकड़ा एवं डॉ. स्वाति कुजूर द्वारा तकनीकी विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई।डॉ. प्रियंका लकड़ा ने “न्यायालयिक डी.एन.ए. (Forensic DNA)” विषय पर पावर पॉइंट प्रस्तुति देते हुए बताया कि DNA को न्याय का “ब्लूप्रिंट” कहा जाता है। मानव DNA का 99.9% हिस्सा समान होता है, जबकि 0.1% अंतर व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करता है। उन्होंने रक्त, लार, वीर्य, बाल, हड्डी, दाँत एवं टच DNA जैसे जैविक साक्ष्यों के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने निर्भया केस, तंदूर मर्डर केस एवं श्रद्धा वाकर केस जैसे प्रकरणों में DNA साक्ष्य की निर्णायक भूमिका को रेखांकित किया।डॉ. स्वाति कुजूर ने “न्यायालयिक जीव विज्ञान (Forensic Biology)” विषय पर जानकारी देते हुए बताया कि यह शाखा अपराध स्थल से प्राप्त जैविक नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर जांच में सहायता प्रदान करती है।
उन्होंने प्रारंभिक परीक्षण (Presumptive Test), जाति पहचान (Species Identification) तथा मानव विज्ञान, वनस्पति विज्ञान एवं कीट विज्ञान की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैविक साक्ष्य का उचित संकलन अपराध की सच्चाई तक पहुँचने की दिशा में पहला एवं सबसे महत्वपूर्ण कदम है।विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि DNA एवं जैविक साक्ष्य अत्यंत संवेदनशील होते हैं, जिन्हें नमी, तापमान एवं बैक्टीरिया से बचाना आवश्यक है।

साक्ष्यों को प्लास्टिक की बजाय कागज़ के बैग में सुरक्षित रखना तथा “चेन ऑफ कस्टडी” का पूर्ण पालन करना अनिवार्य है।कार्यशाला के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस अधिकारियों ने विवेचना के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याएँ साझा कीं।
विशेषज्ञों द्वारा उनका समाधान विस्तारपूर्वक किया गया।इस प्रशिक्षण में बिलासपुर रेंज के सभी जिलों से लगभग 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी ऑनलाईन माध्यम से जुड़े और प्रशिक्षण प्राप्त किया।
कार्यक्रम के समापन पर पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग द्वारा प्रशिक्षक डॉ. प्रियंका लकड़ा एवं डॉ. स्वाति कुजूर को स्मृति चिन्ह (मोमेंटो) प्रदान कर सम्मानित किया गया तथा उनके योगदान हेतु आभार व्यक्त किया गया।कार्यक्रम का सफल संचालन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल द्वारा किया गया।













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