संवेदनशील नेतृत्व का असर, एसएसपी रजनेश सिंह की अगुवाई में बिछड़े चेहरों को मिली नई जिंदगी

ऑपरेशन मुस्कान और तलाश: बिछड़े चेहरों की फिर लौटी मुस्कान

बिलासपुर पुलिस की मानवीय पहल से 69 बच्चे और 579 लोग पहुंचे अपने घर

बिलासपुर कभी-कभी पुलिस की वर्दी सिर्फ कानून नहीं निभाती, बल्कि टूटे हुए रिश्तों को जोड़ने का जरिया भी बन जाती है। बिलासपुर में ऐसा ही दृश्य सामने आया, जहां “ऑपरेशन मुस्कान” और “ऑपरेशन तलाश” ने कई परिवारों की जिंदगी में फिर से खुशी लौटा दी।

पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर के निर्देश पर पूरे प्रदेश में अप्रैल 2026 के दौरान चलाए गए इस विशेष अभियान में बिलासपुर पुलिस ने संवेदनशीलता और तत्परता का परिचय देते हुए कुल 69 अपहृत बालक/बालिकाओं तथा 579 महिला एवं पुरुषों को सकुशल दस्तयाब किया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह के निर्देशन में इस अभियान को केवल एक कानूनी प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि एक मानवीय जिम्मेदारी के रूप में आगे बढ़ाया गया। उन्होंने सभी थाना प्रभारियों और अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण में गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

तकनीकी विश्लेषण और मजबूत मुखबिर तंत्र के आधार पर कई मामलों में यह जानकारी सामने आई कि अपहृत लोग राज्य के बाहर भी मौजूद हैं। इसके बाद विशेष टीमों का गठन कर उन्हें महाराष्ट्र और ओडिशा सहित विभिन्न राज्यों में रवाना किया गया।

इन प्रयासों के परिणामस्वरूप महाराष्ट्र से 02 और ओडिशा से 01 बालिका को सुरक्षित बरामद किया गया, जबकि राज्य के भीतर 66 बालक/बालिकाएं तथा 579 महिला एवं पुरुषों को उनके परिजनों तक पहुंचाया गया।यह अभियान 01 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक चला, जिसमें कुल 11 बालक और 58 बालिकाएं तथा 430 महिला और 149 पुरुष अपने परिवारों से फिर मिल सके।घर लौटे लोगों के चेहरों पर राहत थी, और परिजनों की आंखों में लंबे इंतजार के बाद मिला सुकून साफ झलक रहा था।

कई परिवारों ने इस मानवीय पहल के लिए बिलासपुर पुलिस का आभार व्यक्त किया।वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह ने इस उपलब्धि पर पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता पुलिसिंग के साथ-साथ संवेदनशीलता और समर्पण का परिणाम है।

गौरतलब है कि इस अभियान में बिलासपुर जिले ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत राज्य में प्रथम स्थान तथा ऑपरेशन तलाश के तहत 579 दस्तयाबियों के साथ राज्य में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है।

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