रायगढ़ में पेलमा कोल माइंस परियोजना को लेकर अब विरोध खुलकर सामने आ रहा है। आधा दर्जन से अधिक प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपकर 19 मई को प्रस्तावित जनसुनवाई स्थगित करने की मांग की है।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार से जुड़ी सभी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक जनसुनवाई करना न्यायसंगत नहीं है। मुआवजा दरों में गांव-गांव के हिसाब से अंतर को लेकर भी नाराजगी है लोगों का कहना है कि एक ही परियोजना में मुआवजा भी एक समान होना चाहिए, खासकर दो फसली और उपजाऊ जमीन के मामले में।ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी आजीविका खेती पर निर्भर है, इसलिए केवल नगद मुआवजा पर्याप्त नहीं होगा।
जमीन के बदले जमीन और परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की मांग जोर पकड़ रही है।प्रशासन पर आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने कहा कि पहले भी कई बार लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे असंतोष और अविश्वास बढ़ा है।
⚠️ चेतावनी भी साफ है यदि मांगों को नजरअंदाज किया गया और जनसुनवाई स्थगित नहीं हुई, तो ग्रामीण बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।




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