LIC में ₹28.55 लाख का गबन: तत्कालीन सहायक प्रशासनिक अधिकारी गिरफ्तार, EOW/ACB ने कोर्ट में पेश की चार्जशीट

सूरजपुर। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की अंबिकापुर इकाई ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के विश्रामपुर सैटेलाइट कार्यालय में करोड़ों नहीं, बल्कि ₹28,55,968 के गबन के चर्चित मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी के विरुद्ध विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र (चार्जशीट) पेश कर दिया है। शुक्रवार 10 जुलाई 2026 को आरोपी को गिरफ्तार कर माननीय विशेष न्यायालय (पीसी एक्ट), सूरजपुर के समक्ष पेश किया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले की शुरुआत भारतीय जीवन बीमा निगम के विश्रामपुर सैटेलाइट कार्यालय के तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनोद कुमार सोनी द्वारा ब्यूरो मुख्यालय ईओडब्ल्यू रायपुर को भेजी गई शिकायत से हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कार्यालय में पदस्थ तत्कालीन सहायक प्रशासनिक अधिकारी अमोद कुमार लकड़ा ने ग्राहकों से प्राप्त प्रीमियम की बड़ी राशि बैंक में जमा करने के बजाय उसका गबन कर लिया।

इन तारीखों की राशि का हुआ गबन

जांच में सामने आया कि आरोपी ने अलग-अलग तिथियों में प्राप्त नकद संग्रह राशि को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की सतपता शाखा में जमा नहीं किया। इनमें शामिल हैं—

  • 4 अप्रैल 2019 – ₹3,03,584
  • 4 सितंबर 2019 – ₹6,69,434
  • 19 अक्टूबर 2019 – ₹2,79,064
  • 18 नवंबर 2019 – ₹5,50,397
  • 24 अप्रैल 2020 – ₹7,21,972
  • 29 सितंबर 2020 – ₹3,30,617
  • 14 अक्टूबर 2020 – ₹3,09,399 (बैंक में ₹3,08,399 जमा, ₹1,000 का अंतर)

इन सभी राशियों को मिलाकर कुल ₹28,55,968 की रकम का गबन किया गया।

फर्जी पे-इन स्लिप बनाकर छिपाया गबन

विवेचना के दौरान ईओडब्ल्यू/एसीबी को पता चला कि आरोपी ने बैंक में राशि जमा नहीं की, बल्कि कूटरचित (फर्जी) पे-इन स्लिप तैयार कर उसे एलआईसी शाखा में जमा कर दिया, ताकि रिकॉर्ड में राशि जमा होना दर्शाया जा सके। इसी फर्जीवाड़े के जरिए लंबे समय तक गबन को छिपाने की कोशिश की गई।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

शिकायत और जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अपराध क्रमांक 11/2022 दर्ज किया गया। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता लागू होने से पहले की घटना होने के कारण भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 409 (लोक सेवक द्वारा आपराधिक न्यास भंग), 467 (मूल्यवान दस्तावेज की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध कायम किया गया।

गिरफ्तारी के बाद कोर्ट में पेश

ईओडब्ल्यू/एसीबी अंबिकापुर ने 10 जुलाई 2026 को आरोपी अमोद कुमार लकड़ा को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), सूरजपुर में पेश किया। साथ ही विवेचना पूरी होने के बाद आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र (चार्जशीट) भी न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया।

सरकारी संस्थानों में आर्थिक अपराध पर सख्त कार्रवाई

ईओडब्ल्यू/एसीबी की इस कार्रवाई को सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में आर्थिक अनियमितताओं तथा गबन के मामलों पर सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन और सार्वजनिक संस्थानों की राशि के दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

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