खरसिया के सेंट जॉन्स स्कूल में Cyber Awareness का पाठ, पुलिस ने बच्चों को बताया—‘Online दुनिया में एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी’

NKB National News Report

खरसिया। आज का दौर डिजिटल है, पढ़ाई से लेकर खरीदारी तक, बैंकिंग से लेकर मनोरंजन तक और बातचीत से लेकर पैसे के लेन-देन तक, हमारी जिंदगी का बड़ा हिस्सा अब मोबाइल स्क्रीन पर सिमट गया है। लेकिन इसी डिजिटल दुनिया में साइबर अपराधियों का जाल भी तेजी से फैल रहा है। इसी खतरे को समझाने और नई पीढ़ी को Cyber Smart Citizen बनाने के उद्देश्य से रायगढ़ पुलिस द्वारा जिलेभर में चलाए जा रहे साइबर जागरूकता अभियान के तहत खरसिया में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन और एसडीओपी सतीश भार्गव के नेतृत्व में खरसिया थाना पुलिस द्वारा रायगढ़ चौक स्थित सेंट जॉन्स स्कूल में विद्यार्थियों को साइबर अपराधों से बचाव और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम में डीएसपी सतीश भार्गव, थाना प्रभारी निरीक्षक सीताराम ध्रुव, चौकी प्रभारी निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी, प्रोविजन एसआई प्रवीण बांधव सहित खरसिया थाना पुलिस की टीम मौजूद रही।

पुलिस टीम के स्कूल पहुंचते ही बच्चों ने उत्साह के साथ किया स्वागत सेंट जॉन स्कूल पहुंची पुलिस टीम का विद्यार्थियों और स्कूल प्रबंधन की ओर से गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। बच्चों में पुलिस अधिकारियों से मिलने और साइबर सुरक्षा के बारे में जानने को लेकर खासा उत्साह दिखाई दिया। विद्यार्थियों ने पूरे कार्यक्रम के दौरान ध्यानपूर्वक पुलिस अधिकारियों की बातें सुनीं और कई सवाल भी पूछे। पुलिस टीम ने भी बच्चों के साथ सहज माहौल में संवाद करते हुए साइबर अपराधों के अलग-अलग तरीकों को सरल भाषा में समझाया

स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों ने भी कार्यक्रम को बताया जरूरी पहल विद्यालय के शिक्षकों और प्रबंधन ने कहा कि आज बच्चों का अधिकांश समय इंटरनेट और मोबाइल से जुड़ा है। ऐसे में पढ़ाई के साथ-साथ डिजिटल सुरक्षा की जानकारी देना भी बेहद जरूरी हो गया है शिक्षकों ने पुलिस टीम द्वारा विद्यार्थियों को दी गई जानकारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी जागरूकता बच्चों को भविष्य में ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों से बचाने में मदद करेगी।

बच्चों के लिए यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि Digital Safety की नई सीख बनी पुलिस टीम ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए बताया कि साइबर अपराधी अक्सर लोगों की तकनीकी जानकारी से नहीं, बल्कि उनकी जल्दबाजी, लालच, डर और भरोसे का फायदा उठाकर ठगी करते हैं। इसलिए किसी भी अनजान संदेश, फोन कॉल, लिंक या ऑनलाइन ऑफर पर तुरंत विश्वास करने के बजाय पहले उसकी सच्चाई जांचना बेहद जरूरी है

बच्चों को समझाया गया मोबाइल स्मार्ट है, लेकिन उससे ज्यादा स्मार्ट आपको रहना है पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को बताया कि बैंक, एटीएम, UPI, क्रेडिट कार्ड या किसी भी डिजिटल खाते से जुड़ा OTP, PIN, CVV, Password और UPI PIN किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। पुलिस या बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति यदि ऐसी जानकारी मांगता है तो सतर्क हो जाएं, क्योंकि वास्तविक बैंक अधिकारी इस प्रकार की गोपनीय जानकारी फोन पर नहीं मांगते

Link आया है, बस खोलना है’यही गलती खाते तक पहुंचा सकती है विद्यार्थियों को फर्जी लिंक और संदिग्ध वेबसाइटों से सावधान रहने की सलाह दी गई कई बार साइबर ठग इनाम, नौकरी, छात्रवृत्ति, KYC अपडेट, बिजली बिल, बैंक खाता बंद होने या किसी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर लिंक भेजते हैं। एक बार लिंक पर क्लिक करने के बाद व्यक्ति को फर्जी वेबसाइट पर ले जाकर उसकी निजी जानकारी या बैंक संबंधी जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। इसलिए अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।

QR Code देखकर खुश होने से पहले एक बार सोचिए विद्यार्थियों को बताया गया कि QR Code सामान्यतः भुगतान करने के लिए स्कैन किया जाता है, लेकिन ठग कई बार QR Code या Payment Request के जरिए लोगों को भ्रमित करते हैं। पैसे प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति कहे कि पैसे आपके खाते में आने हैं और इसके लिए UPI PIN डालिए, तो तुरंत सावधान हो जाएं।

Digital Arrest—डर पैदा करके ठगी का नया तरीका। पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली ठगी के बारे में भी बताया। साइबर ठग पुलिस, CBI, ED, कोर्ट या किसी सरकारी अधिकारी का नाम लेकर वीडियो कॉल कर सकते हैं और व्यक्ति को किसी अपराध में फंसाने की धमकी देकर पैसे की मांग कर सकते हैं। ऐसे मामलों में डरने की जरूरत नहीं है। कोई भी वास्तविक कानून व्यवस्था की कार्रवाई इस तरह वीडियो कॉल पर पैसे जमा करवाकर नहीं होती।

Social Media पर हर दोस्त अपना नहीं होता बच्चों को Instagram, Facebook, WhatsApp और अन्य Social Media Platforms पर सावधानी बरतने की सलाह दी गई। अपनी निजी जानकारी, घर का पता, स्कूल की जानकारी, मोबाइल नंबर, पासवर्ड, निजी तस्वीरें और यात्रा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करनी चाहिए। अनजान Friend Request स्वीकार करने से पहले प्रोफाइल की वास्तविकता जांचना जरूरी है।

Password ऐसा रखें जिसे अपराधी अनुमान से न पकड़ पाए। विद्यार्थियों को मजबूत पासवर्ड रखने, अलग-अलग खातों के लिए अलग पासवर्ड इस्तेमाल करने और जहां संभव हो वहां Two-Factor Authentication यानी 2FA चालू रखने की सलाह दी गई। पुलिस ने समझाया कि जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, नाम या 123456 जैसे आसान पासवर्ड से बचना चाहिए।

Online Gaming और Free Gift के नाम पर भी सावधान साइबर ठगी केवल बैंक खातों तक सीमित नहीं है Online Gaming, फर्जी प्रतियोगिता, Lucky Draw, Free Gift, Discount और नौकरी के नाम पर भी लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा सकता है। बच्चों को किसी भी गेम या वेबसाइट पर अनजान व्यक्ति को पैसे भेजने, निजी जानकारी देने या संदिग्ध Application डाउनलोड करने से बचने की सलाह दी गई।

फर्जी नौकरी और Scholarship के नाम पर भी बन सकता है शिकार विद्यार्थियों को बताया गया कि इंटरनेट पर नौकरी, परीक्षा, छात्रवृत्ति या किसी सरकारी योजना के नाम पर आने वाले संदेशों की आधिकारिक वेबसाइट से पुष्टि करनी चाहिए। केवल WhatsApp Message या किसी अनजान नंबर से मिली जानकारी के आधार पर पैसे जमा नहीं करने चाहिए।

Cyber Bullying भी गंभीर समस्या है पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को Online Harassment, Fake Profile, अश्लील संदेश, धमकी, निजी तस्वीरों के गलत इस्तेमाल और Cyber Bullying जैसी घटनाओं के प्रति भी जागरूक किया। ऐसी स्थिति में चुप रहने के बजाय अभिभावकों, शिक्षकों और पुलिस को जानकारी देने की सलाह दी गई। साथ ही किसी आपत्तिजनक संदेश या धमकी को तुरंत मिटाने के बजाय उसका Screenshot और अन्य Digital Evidence सुरक्षित रखने की बात भी समझाई गई।

पुलिस ने बच्चों से कहा—‘साइबर अपराध में चुप्पी अपराधी की ताकत बढ़ाती है।’ अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन आर्थिक ठगी हो जाती है तो घबराकर बैठने या ठग से बातचीत में समय गंवाने के बजाय तुरंत शिकायत करनी चाहिए। साइबर वित्तीय ठगी के मामलों में 1930 Cyber Crime Helpline पर तत्काल सूचना देने और National Cyber Crime Reporting Portal के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई। जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी जल्दी संबंधित एजेंसियों को रकम के प्रवाह पर कार्रवाई का अवसर मिल सकता है

बच्चों ने भी साझा किए अपने सवाल और अनुभव कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने साइबर अपराधों से जुड़े कई सवाल पूछे और यह जानने में रुचि दिखाई कि यदि कभी किसी अनजान व्यक्ति का संदेश या संदिग्ध लिंक उनके मोबाइल पर आए तो उन्हें क्या करना चाहिए। पुलिस अधिकारियों ने बच्चों के सवालों का सरल भाषा में जवाब दिया। जानकारी मिलने के बाद बच्चों में काफी उत्साह दिखाई दिया और उन्होंने कहा कि अब वे अपने घर में भी माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को साइबर ठगी से बचने के लिए सावधान करेंगे।

पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को Cyber Ambassador बनने का संदेश भी दिया कार्यक्रम में कहा गया कि जागरूकता केवल खुद तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बच्चे अपने माता-पिता, दादा-दादी, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी से बचने के तरीके बताएं। खासकर बुजुर्ग लोग अक्सर फर्जी बैंक कॉल, KYC अपडेट, बिजली बिल, निवेश और Digital Arrest जैसे मामलों में ठगों के निशाने पर आते हैं।

डीएसपी सतीश भार्गव ने विद्यार्थियों को डिजिटल अनुशासन का महत्व समझाते हुए कहा कि तकनीक सुविधा है, लेकिन सावधानी उसकी सुरक्षा है। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे इंटरनेट का इस्तेमाल ज्ञान, शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों के लिए करें, लेकिन किसी अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से बचने का सबसे मजबूत हथियार जागरूकता है।

थाना प्रभारी निरीक्षक सीताराम ध्रुव ने कहा कि साइबर अपराध का स्वरूप लगातार बदल रहा है। आज ठग नई-नई तकनीकों और नए तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में परिवार के हर सदस्य का जागरूक होना जरूरी है। उन्होंने बच्चों से कहा कि अगर उनके साथ या उनके किसी परिचित के साथ साइबर ठगी होती है तो मामले को छिपाने के बजाय तत्काल पुलिस को जानकारी दें।

चौकी प्रभारी निरीक्षक त्रिनाथ त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को Social Media और मोबाइल के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक किया। उन्होंने कहा कि अनजान लिंक, अनजान Application और अनजान लोगों से बातचीत करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने बच्चों को अपनी निजी जानकारी को Digital Privacy के साथ सुरक्षित रखने की सलाह दी।

यातायात पुलिस की ओर से मदन भगत ने भी विद्यार्थियों को यातायात नियमों के साथ-साथ ऑनलाइन ठगी और डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक करते हुए सतर्क रहने का संदेश दिया।

कार्यक्रम के अंत में बच्चों के चेहरों पर दिखा उत्साह साइबर सुरक्षा से जुड़ी जानकारी मिलने के बाद विद्यार्थियों में खासा उत्साह दिखाई दिया। बच्चों ने पुलिस अधिकारियों और पूरी टीम का आभार जताया और कहा कि मोबाइल और इंटरनेट का उपयोग करते समय अब वे पहले से ज्यादा सावधानी बरतेंगे। स्कूल के शिक्षकों और प्रबंधन ने भी इस पहल को विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने की आवश्यकता जताई।

खरसिया पुलिस का संदेश साफ है साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी है, यदि परिवार का एक सदस्य जागरूक होगा तो पूरा परिवार सुरक्षित होगा और यदि स्कूल का एक बच्चा जागरूक होगा तो वह अपने घर और समाज के कई लोगों को साइबर ठगी से बचा सकता है।

SSP शशि मोहन सिंह का विशेष संदेश

सतर्क नागरिक, सुरक्षित समाज’वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन में रायगढ़ पुलिस का साइबर जागरूकता अभियान केवल कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य लोगों की डिजिटल आदतों में सुरक्षा को शामिल करना है।

संदेश बिल्कुल स्पष्ट है Cyber Crime से बचने के लिए डरने की नहीं, जागरूक रहने की जरूरत है। मोबाइल आपके हाथ में है, इसलिए आपकी सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी भी आपके हाथ में है। किसी अनजान कॉल पर भरोसा न करें, OTP-PIN साझा न करें, संदिग्ध लिंक न खोलें, UPI Payment करते समय सावधानी रखें और ठगी होने पर समय गंवाए बिना 1930 पर सूचना दें।

आज की जागरूकता ही कल की बड़ी ठगी को रोक सकती है।रायगढ़ पुलिस की अपील—‘खुद जागरूक बनिए, परिवार को जागरूक कीजिए और साइबर अपराधियों को हराने में पुलिस का साथ दीजिए।’

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