गोरखपुर में मनरेगा के तालाब कार्य पर उठे सवाल: सूचना पटल पर ‘नवीनीकरण एवं रख-रखाव’, सरपंच ने बताया गहरीकरण का काम
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के विकासखंड गौरेला अंतर्गत ग्राम पंचायत गोरखपुर के ग्राम बेलगहना में मनरेगा के तहत कराए गए तालाब कार्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्यस्थल पर लगे नागरिक सूचना पटल में जहां कार्य का नाम “समुदाय के लिये सामुदायिक जल संचयन पथरा तालाब नवीनीकरण एवं रख-रखाव” दर्ज है, वहीं ग्राम पंचायत के सरपंच ने पूछे जाने पर इसे तालाब गहरीकरण का कार्य बताया।

कार्य के विवरण और मौके पर बताए गए कार्य के स्वरूप में अंतर सामने आने के बाद अब पूरे मामले की वास्तविक स्थिति को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
सूचना पटल पर दर्ज है 8.39 लाख रुपये की स्वीकृत राशि

कार्यस्थल पर लगाए गए नागरिक सूचना पटल के अनुसार यह कार्य महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा), वर्ष 2023-24 के अंतर्गत स्वीकृत किया गया था। इसका स्थान ग्राम बेलगहना, ग्राम पंचायत गोरखपुर, विकासखंड गौरेला दर्ज है।
बोर्ड पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कार्य की प्रशासकीय स्वीकृति 15 मार्च 2024 को दी गई थी और इसके लिए ₹8.39 लाख की स्वीकृत राशि दर्ज है। कार्य का निर्धारित क्षेत्रफल 120 मीटर × 60 मीटर बताया गया है।वहीं श्रमिक मद में ₹4,49,552.45 व्यय और कुल 1839 मानव दिवस सृजित होने की जानकारी सूचना पटल पर दर्ज है। मानव दिवस की दर ₹261 प्रति दिवस बताई गई है।
बोर्ड के अनुसार कार्य की अवधि 16 मार्च 2024 से 24 जून 2024 तक निर्धारित थी।
बोर्ड पर नवीनीकरण, सरपंच ने बताया गहरीकरण
मामले में सबसे अहम सवाल कार्य के स्वरूप को लेकर सामने आ रहा है। कार्यस्थल पर लगे सूचना पटल में इसे तालाब नवीनीकरण एवं रख-रखाव के रूप में दर्ज किया गया है। वहीं, जब हमारी टीम ने मौके का निरीक्षण किया और ग्राम पंचायत गोरखपुर के सरपंच से कार्य के संबंध में जानकारी ली, तो उन्होंने इसे तालाब गहरीकरण का कार्य बताया।यही अंतर अब सवालों के घेरे में है कि स्वीकृत कार्य वास्तव में किस स्वरूप में कराया गया और स्वीकृत प्राक्कलन एवं मापदंड के अनुसार मौके पर कितना काम हुआ।
मौके की स्थिति को लेकर भी उठ रहे सवाल
कार्यस्थल का निरीक्षण करने के दौरान तालाब परिसर की मौजूदा स्थिति को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि मनरेगा के तहत निर्धारित राशि खर्च हुई है, तो मौके पर स्वीकृत कार्य और उसकी मात्रा स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।हालांकि, केवल मौके की स्थिति के आधार पर किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति मनरेगा के स्वीकृत प्राक्कलन, तकनीकी माप, मस्टर रोल, भुगतान विवरण, एमबी (Measurement Book) और विभागीय रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।

120×60 मीटर क्षेत्र में कितना हुआ काम?
सूचना पटल पर कार्य क्षेत्रफल 120 मीटर × 60 मीटर दर्ज है। ऐसे में सवाल यह है कि निर्धारित क्षेत्रफल में स्वीकृत कार्य के अनुसार वास्तव में कितना नवीनीकरण, रख-रखाव या गहरीकरण कराया गया।साथ ही 1839 मानव दिवस के हिसाब से दर्ज श्रमिक व्यय और मौके पर हुए वास्तविक कार्य के बीच भी मिलान किया जाना जरूरी है। यदि रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा इसकी जांच कर स्थिति स्पष्ट की जा सकती है।
निष्पक्ष जांच से साफ होगी वास्तविक तस्वीर

फिलहाल उपलब्ध जानकारी और मौके पर लगे सूचना पटल के आधार पर इतना स्पष्ट है कि कार्य के नाम और सरपंच द्वारा बताए गए कार्य के स्वरूप में अंतर दिखाई देता है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कार्य स्वीकृत मापदंडों के अनुरूप कराया गया या नहीं और दर्ज व्यय के अनुसार वास्तविक काम कितना हुआ।ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने भी संबंधित विभाग से कार्य की तकनीकी जांच और रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है, ताकि मनरेगा के तहत कराए गए इस कार्य की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान कर क्या कार्रवाई करता है।
bureau report gpm







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