🌳 “विकास” की आड़ में विनाश: तमनार में अदानी पावर प्लांट के लिए उजड़ता जीवन
लेखक: Pooja Jaiswal
प्रकाशन तिथि: 29 जून 2025
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले का तमनार — जहां कभी घने जंगल जीवन की सांसें भरते थे, आज वहां मशीनें गर्जना कर रही हैं, और पेड़ एक-एक कर गिरते जा रहे हैं। सरकार कहती है ये “विकास” है, कंपनियां कहती हैं ये “समृद्धि” है, लेकिन जमीन पर जो हो रहा है, वो है — जनजीवन का सुनियोजित कत्ल।
“जहां आदिवासी पीढ़ियों से प्रकृति के साथ जी रहे थे, वहां अब पूंजीपति पेड़ों को गिनकर मुनाफा काट रहे हैं!”
अदानी पावर प्लांट के लिए की जा रही इस वनों की अंधाधुंध कटाई ने न सिर्फ पर्यावरण को, बल्कि स्थानीय लोगों के अस्तित्व को भी खतरे में डाल दिया है। जिन जंगलों में कभी जीवन गूंजता था, वहां अब सन्नाटा पसरा है।
जंगल के साथ मिट रहे हैं सपने
यह सिर्फ पेड़ नहीं हैं जो कट रहे हैं, ये उन परिवारों की उम्मीदें, संस्कृति, और सैकड़ों साल पुरानी पहचान है। जिन हाथों ने जंगलों को बचाया, उन्हीं के घरों को उजाड़ा जा रहा है — और हद तो तब हो जाती है जब इस बर्बादी को “राष्ट्रीय हित” बताया जाता है।
“बिजली बनाने के नाम पर अगर अंधकार फैलाया जाए, तो उसे विकास नहीं, धोखा कहते हैं!”
सरकार की चुप्पी — साजिश या सहमति?
प्रशासन मौन है, मीडिया का एक बड़ा वर्ग भी इस मुद्दे से आँखें फेर रहा है। सवाल ये है — क्या जनता की आवाज़ अब सिर्फ उनतक पहुँचती है जिनकी जेबें भारी होती हैं?
“पेड़ काटने वालों को मुआवजा मिलता है, लेकिन जिनकी ज़िंदगी कटी — उन्हें कोई पूछता भी नहीं!”
कहां जाए ये लोग?
जो लोग अब तक जंगलों में जीते आए थे, वो शहर नहीं जा सकते, ना ही अब गाँव बचा है। बच्चों की पढ़ाई, बड़ों की रोज़ी, बुज़ुर्गों की दवाइयां — सबकुछ खतरे में है।
अभी भी समय है — अगर जंगल बचे तो जीवन बचेगा, वरना बिजली जलाने के चक्कर में हम खुद को राख बना बैठेंगे।
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