जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रविन्द्र गवेल ने अपने बूथ नवापारा में तिरंगा यात्रा निकालकर पेश की मिसाल


जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रविन्द्र गवेल ने अपने बूथ नवापारा में तिरंगा यात्रा निकालकर पेश की मिसाल

खरसिया। आज के राजनीतिक माहौल में अक्सर यह देखा जाता है कि बड़े पदों पर बैठे नेता जिले, प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में तो सक्रिय रहते हैं, लेकिन अपने मूल बूथ और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच उनकी मौजूदगी कम ही देखने को मिलती है। तिरंगा यात्रा जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर भी कई नेता बड़े मंचों पर तो नज़र आते हैं, पर अपने बूथ की गलियों और चौकों में दिखाई नहीं देते। इसे ही आम बोलचाल में “दीया तले अंधेरा” कहा जाता है।

लेकिन इस बार एक अपवाद सामने आया — जिला पंचायत अध्यक्ष शिखा रविन्द्र गवेल ने यह साबित कर दिया कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो अपनी जड़ों को न भूले। उन्होंने न केवल जिले के विभिन्न कार्यक्रमों में नेतृत्व किया, बल्कि अपने बूथ नवापारा में भी भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन कर सबका दिल जीत लिया।

नवापारा में निकली यह तिरंगा यात्रा देशभक्ति के रंग में रंगी हुई थी। गांव की गलियां तिरंगे के रंग से सराबोर हो गईं, बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग, कार्यकर्ता सभी हाथों में तिरंगा लिए भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से वातावरण गुंजायमान कर रहे थे। डीजे की धुन पर देशभक्ति गीतों के साथ यह यात्रा पूरे बूथ क्षेत्र से होकर गुजरी।

कार्यक्रम में उनके पति और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रविन्द्र गवेल भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा —
मैं जमीन से लेकर जिला स्तर तक की जिम्मेदारियाँ निभाता आया हूँ और हमेशा जमीनी रहूँगा।”
यह वक्तव्य न सिर्फ उनकी सोच को दर्शाता है बल्कि यह भी बताता है कि गवेल दंपत्ति राजनीति में सिर्फ पद पाने के लिए नहीं, बल्कि जनता के बीच रहकर काम करने में विश्वास रखते हैं।

शिखा गवेल की यह पहल उन नेताओं के लिए प्रेरणा है, जो अक्सर बड़े-बड़े आयोजनों में व्यस्त होकर अपने ही बूथ को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। उन्होंने दिखाया कि जिले का नेतृत्व करते हुए भी अपने मूल क्षेत्र को महत्व देना उतना ही जरूरी है, जितना बड़े मंचों पर उपस्थिति दर्ज कराना।

तिरंगा केवल एक झंडा नहीं है, यह स्वतंत्रता, बलिदान और एकता का प्रतीक है। और जब इसे अपने ही बूथ में, अपनी जनता के बीच फहराया जाता है, तो यह संदेश और भी गहरा और प्रेरणादायक हो जाता है।

शिखा गवेल का यह कदम साफ बताता है कि वह केवल “जिला अध्यक्ष” नहीं, बल्कि एक संवेदनशील, जमीनी और समर्पित नेता हैं — जो जनता के दिलों में अपने काम से जगह बनाती हैं, न कि सिर्फ कुर्सी से। 🇮🇳


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