“जवाहर कॉलोनी में नशे का जाल! मेडिकल स्टोर्स की जांच करे प्रशासन — बच्चों तक पहुँच रहा खतरनाक इंजेक्शन”

मेडिकल स्टोर्स की गुप्त सप्लाई पर लगे रोक — पुलिस की सतर्कता से होती भी है कई कार्यवाही , पर समस्या जड़ से खत्म नहीं”

जवाहर कॉलोनी में बच्चों का इंजेक्शन नशा — पुलिस करती है कार्यवाही देती भी है समझाइश पर फिर से जुटते हैं ये नशेड़ी ; प्रशासन और सरकार सख्त नियम बनाय

खरसिया।जवाहर कॉलोनी में नाबालिगों द्वारा खुले में इंजेक्शन लगाकर नशा करने की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। स्थानीय नागरिकों और दुकानदारों ने न सिर्फ नशे के मामलों की जानकारी दी बल्कि यह भी बताया कि ये बच्चे अक्सर वही काम दोहराते पाए जाते हैं, भले ही पुलिस उन्हें समय-समय पर पकड़कर कार्यवाही करती हो।

पुलिस विभाग ने बताया कि हाल के महीनों में कॉलोनी में एवं क्षेत्र में नियमित पेट्रोलिंग की जा रही और अपराधियों पर कई गिरफ्तारी अभियान भी चलाए गए। थाना अधिकारियों के अनुसार, “हम लगातार रेड कर रहे हैं, संदिग्धों को पकड़कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है और कई मामलों में आरोपियों पर मादक द्रव्यों के आपूर्ति के भी आरोप दर्ज किए गए हैं।”

पर स्थानीय लोग कहते हैं कि गिरफ्तारी के बाद भी कुछ अपराधी थोड़े ही समय में वापस आकर वही गतिविधियाँ शुरू कर देते हैं।स्थानीय निवासियों ने यह भी बताया

कि कुछ मेडिकल स्टोर्स बिना पर्ची के इंजेक्शन और अन्य दवाएँ उपलब्ध करा देते हैं, जिससे बच्चों और युवाओं तक नशीली चीज़ें पहुँचना आसान हो जाता है। मेडिकल स्टोर संचालक सुरक्षा कारणों से खुलकर कुछ बताने से कतराते हैं, पर लोग मांग कर रहे हैं कि इन दुकानों की भी कड़ी जांच हो।

पुलिस हमारी कॉलोनी में सक्रिय है, और पेट्रोलिंग भी करती है, पर पकड़ के बाद पूरी आपूर्ति शृंखला और पुनर्वास का इंतज़ाम नहीं होने से समस्या बार-बार उभर आती है,” एक स्थानीय नागरिक ने कहा।

समाज के नेताओं और नागरिकों की एक बड़ी मांग यह बनी है कि केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं — सरकार को नशीली दवाओं, विशेषकर इंजेक्शन वाले मादक पदार्थों की आपूर्ति और बिक्री पर कड़े नियम बनाकर लागू करने होंगे।

प्रस्तावित मांगों में शामिल हैं:

मेडिकल स्टोर्स पर सख्त लाइसेंसिंग और नियमित औचक निरीक्षण।

बिना डॉक्टर पर्ची के किसी भी तरह की इंजेक्शन/नशीली दवा की बिक्री पर दंड में कड़ी वृद्धि।

पकड़ने के साथ-साथ पकड़ चुके आरोपियों के लिए अनिवार्य रिहैब और पुनर्वास कार्यक्रम।

ड्रग कंट्रोल विभाग, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का समन्वित ‘टास्क फोर्स’ जो आपूर्ति स्रोतों को ट्रैक करे

स्कूलों और आंगनवाड़ियों में जागरूकता और माता-पिता के लिए प्रशिक्षण।

NKB National News की अपील: यह समस्या सिर्फ कानून प्रवर्तन से नहीं सुलझेगी — सरकार, प्रशासन, स्वास्थ्य सेवाएँ, मेडिकल स्टोर्स और समाज-सब मिलकर कड़े नियम, रोकथाम और उपचार का एक समेकित कार्यक्रम बनायें।

आज के नाबालिग कल के नागरिक हैं — अगर समय रहते कदम न उठाये गये तो नतीजे भयावह होंगे।

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