एनटीपीसी लारा के विरुद्ध जल्द होगा आंदोलन का शंखनाद, देशभर के आंदोलनकारी जुटेंगे – लारा संघर्ष

एनटीपीसी लारा के विरुद्ध जल्द होगा आंदोलन का शंखनाद, देशभर के आंदोलनकारी जुटेंगे – लारा संघर्ष

रायगढ़।एनटीपीसी लारा परियोजना एक बार फिर विवादों के घेरे में है। भूमि मुआवजा, फ्लाईऐश परिवहन, कथित घोटालों और प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर पहले से चर्चित यह परियोजना अब पुनर्वास नीति और बेरोजगारी भत्ते के मुद्दे पर आंदोलन की ओर बढ़ती दिख रही है। लारा संघर्ष से जुड़े पदाधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि जल्द ही बड़े स्तर पर आंदोलन का शंखनाद किया जाएगा, जिसमें देशभर के आंदोलनकारियों को आमंत्रित किया जाएगा।

लारा संघर्ष के अनिल चीकू, अरविंद कुमार प्रधान, हरिकिशन पटेल, नारायण साव, मुरली थवाईत और कौशिक गुप्ता ने बताया कि एनटीपीसी लारा योजना के तहत रायगढ़ जिले के पुसौर ब्लॉक के लारा, कांदागढ़, लोहाखान, बोडाझरिया, छपोरा, आरमुड़ा, देवलसुर्रा, झिलंगिटार सहित कई गांवों की हजारों एकड़ जमीन वर्ष 2011 में अधिग्रहित की गई थी।

यह अधिग्रहण तत्कालीन कलेक्टर रायगढ़ के माध्यम से जिला उद्योग केंद्र की लैंड बैंक योजना के तहत हुआ था, जिसमें छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति को पूरी तरह लागू करने का प्रावधान था।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि एनटीपीसी ने 5×800 मेगावाट यानी 4000 मेगावाट क्षमता की परियोजना के लिए भूमि लेने के बदले सहमति पत्र में विस्थापित और प्रभावित परिवारों के लगभग 1600 सदस्यों को स्थायी और नियमित रोजगार देने का आश्वासन दिया था।

चारदीवारी बनने के बाद भी आज तक इस वादे को पूरा नहीं किया गया, जिससे प्रभावित परिवारों की युवा पीढ़ी रोजगार के लिए दर-दर भटक रही है।लारा संघर्ष का कहना है कि छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति की कंडिका 11.2.3 के अनुसार यदि नियमित रोजगार नहीं दिया जा सकता, तो योग्यता के अनुसार रोजगार गारंटी योजना के तहत देय राशि, यानी बेरोजगारी भत्ता दिया जाना चाहिए था।

आरोप है कि यह राशि वर्षों से नहीं दी गई और अब यह राशि ब्याज सहित अरबों रुपये में पहुंच चुकी है। आंदोलनकारियों ने बेरोजगारी भत्ते की राशि में भारी गड़बड़ी की आशंका जताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।हाल ही में लारा संघर्ष के प्रतिनिधिमंडल ने रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की जांच और विस्थापितों को न्याय दिलाने की मांग की है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो जिले से लेकर प्रदेश और केंद्र स्तर तक आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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