🔴 दलालपाली में तीन दिवसीय जयंती समारोह में गूँजा ‘मनखे-मनखे एक समान’ का संदेश
सक्ती। ग्राम दलालपाली में प्रातः स्मरणीय संत शिरोमणि गुरु घासीदास बाबा जी की तीन दिवसीय जयंती समारोह श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और “जय सतनाम” के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंजता रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ बाबा जी के छायाचित्र एवं जैतखाम पर विधिवत पूजा-अर्चना और चौका-आरती के साथ हुआ। वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया।इस अवसर पर संत खड़ग दास बाबा जी एवं तौलीपाली वाले बाबा जी ने सुमधुर पंथी गीत-संगीत की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
लोककला मंच जमगहन से मुकेश लहरे तथा लोककला मंच मौहापाली से दिनेश कुमार खंडेलवाल सहित विभिन्न ग्रामों से आए कलाकारों ने पारंपरिक लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। पंथी नृत्य ‘खर्रा छाल’ और सतनाम भजन की प्रस्तुति ने आयोजन को आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान की।गुरु बालक दास बालिका पंथी पार्टी बछौरडीह, सिंगर सुमित्रा सायर, दारा सिंह बंजारे और सुमित्रा लोक संगीत जर्वे की प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। तीनों दिवस तक भजन, कीर्तन और लोकसंगीत का क्रम निरंतर चलता रहा।
समारोह के अंतिम दिवस विशेष अतिथियों में राकेश नारायण बंजारे (प्रदेश प्रवक्ता, साहित्य प्रकोष्ठ), तोरन लक्ष्मी, सोमनाथ भारद्वाज और जागेश्वर लक्ष्मी उपस्थित रहे। राकेश नारायण बंजारे ने अपने उद्बोधन में कहा कि बाबा जी का जीवन समता, सत्य, अहिंसा और मानवता का अमर संदेश देता है।
उन्होंने “मनखे-मनखे एक समान” के सिद्धांत को समाज की एकता का मूल बताया और युवाओं से समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।आयोजन को सफल बनाने में युवा समिति और महिला समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मंच संचालन विजय प्रकाश कुर्रे, सुरेन्द्र खांडे, उत्तम खूंटे एवं आशीष जांगड़े ने किया।समारोह के समापन पर आयोजन समिति ने समस्त ग्रामवासियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। ग्राम दलालपाली और आसपास के ग्रामीणों के सहयोग से यह आयोजन श्रद्धा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रेरक उदाहरण बनकर संपन्न हुआ।
















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