जेएन कॉलेज–नगर पालिका विवाद गहराया: बिना अनुमति निर्माण पर Contempt of Court की चेतावनी

जेएन कॉलेज–नगर पालिका विवाद गहराया: बिना अनुमति निर्माण पर Contempt of Court की चेतावनी

सक्ती।सक्ती के जेएन कॉलेज में नगर पालिका और महाविद्यालय प्रबंधन के बीच जमीन और निर्माण को लेकर चल रहा विवाद अब बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है। नगर पालिका परिषद ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कॉलेज प्रबंधन और प्राचार्य ने तीन दिनों के भीतर अपने निर्माण से जुड़े सभी वैधानिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए, तो उनके खिलाफ उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना (Contempt of Court) की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।

क्या है पूरा विवाद ?

नगर पालिका का आरोप है कि जेएन कॉलेज के पश्चिमी हिस्से में बिना अनुमति रोड और कवर निर्माण किया गया है।इसी के साथ, 17 नवंबर 2025 को नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र में आने वाले खेल परिसर में भी बिना किसी स्वीकृति के निर्माण होते पाया गया।नगर पालिका अधिकारियों ने उसी दिन निर्माण कार्य को रोकने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद काम जारी रहने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।

हाईकोर्ट का पुराना आदेश भी आया सवालों में

इस विवाद से जुड़े मामले में महाविद्यालय प्रबंधन पहले ही बिलासपुर हाईकोर्ट जा चुका है।हाईकोर्ट ने 16 जून 2023 को दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने,एक-दूसरे का सहयोग करने का स्पष्ट निर्देश दिया था।नगर पालिका का कहना है कि कॉलेज प्रबंधन ने कोर्ट के आदेश के बावजूद अवैध निर्माण जारी रखा, जो सीधे-सीधे अवमानना का मामला बन सकता है।

नगर पालिका की सख्त चेतावनी

नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर अग्रवाल ने कहा: “कॉलेज परिसर से लगी जमीन वर्षों से खेल गतिविधियों के लिए उपयोग होती रही है। बिना अनुमति निर्माण करवाना नियमों का उल्लंघन ही नहीं, बल्कि हाईकोर्ट के आदेश की भी अवहेलना है।”

नगर पालिका ने प्राचार्य को अंतिम नोटिस जारी करते हुए 3 दिनों में सभी दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है।जवाब संतोषजनक न मिलने पर नगर पालिका Contempt of Court के तहत कठोर कानूनी कदम उठाने की तैयारी में है।

यदि प्रबंधन समय पर दस्तावेज नहीं देता है, तो प्राचार्य पर अदालत की अवहेलना का गंभीर आरोप लग सकता है ,कॉलेज प्रबंधन पर कानूनी दबाव और बढ़ेगा और विवाद पूरी तरह से एक कानूनी लड़ाई में बदल सकता है सक्ती क्षेत्र में शिक्षा संस्थानों और स्थानीय निकाय के बीच यह विवाद अब बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है, और आने वाले दिनों में इसकी गूंज अदालत से लेकर स्थानीय राजनीति तक सुनाई दे सकती है।

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