प्राण प्रतिष्ठा के साथ धन्य हुआ खरसिया… धामा माई धाम बना आस्था का नया अध्याय
खरसिया की पावन धरती ने आज एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण को अपने भीतर संजो लिया। तीन दिनों से चल रहे श्री धामा माई धाम मंदिर के भव्य धार्मिक महोत्सव का आज तीसरे दिन विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा के साथ समापन हुआ। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। शंखनाद, मंत्रोच्चार और हवन की पवित्र ध्वनि के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और दिव्य बना रहा।
मां धामा माई, भगवान शिव, गणेश जी और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं में विधिवत प्राण प्रतिष्ठा की गई। जैसे ही अंतिम आहुतियाँ पूर्ण हुईं, पूरा परिसर “जय माता दी” के जयकारों से गूंज उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं की आँखों में आस्था और संतोष साफ दिखाई दे रहा था।
इस पावन अवसर पर पुलिस और प्रशासनिक अमला भी शामिल हुआ। उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह मंदिर पहुंचे, माँ के समक्ष विधिवत पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद लिया।
साथ ही पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। इसके अलावा प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता निभाई और इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने।

प्राण प्रतिष्ठा के उपरांत मंदिर परिसर में विशाल और भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर के भोजन और रात्रि प्रसाद तक—सभी के लिए समुचित व्यवस्था की गई। मिठाइयों से लेकर संपूर्ण भोजन तक श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक परोसा गया। बड़ी संख्या में लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते नजर आए। यह दृश्य केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि खरसिया की एकता और सामूहिक आस्था का प्रतीक बन गया।
तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में नगर के बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग और युवा बढ़-चढ़कर शामिल हुए। पहले दिन कलश यात्रा, दूसरे दिन भव्य नगर भ्रमण और आज की प्राण प्रतिष्ठा—हर क्षण खरसिया के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ गया।
धामा माई धाम अब केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि खरसिया की आध्यात्मिक पहचान बन चुका है। नगरवासियों का मानना है कि यह धाम आने वाले समय में क्षेत्र के लिए सकारात्मक ऊर्जा, विश्वास और सांस्कृतिक एकता का केंद्र बनेगा।

खरसिया आज सच में धन्य है—जहाँ माँ की कृपा का ऐसा विराट स्वरूप देखने को मिला।
















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