ड्यूटी पर पुलिस, घर पर खतरा,खरसिया पुलिस कॉलोनी में छत गिरने से हड़कंप, क्या किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा सिस्टम

जनता की सुरक्षा करने वाले खुद मौत के साए में,खरसिया पुलिस चौकी कॉलोनी में जर्जर सरकारी मकान की छत गिरी, आरक्षक घायल ,बच्चे बाल-बाल बचे, सिस्टम पर उठे बड़े सवाल

खरसिया । जिस पुलिस विभाग के कंधों पर शहर और जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है, आज उसी विभाग के जवान अपने परिवार के साथ खतरनाक और जर्जर सरकारी मकानों में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। गुरुवार को खरसिया पुलिस चौकी कॉलोनी में हुई एक घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी।

पुलिस कॉलोनी में रहने वाले आरक्षक भगत टंडन के सरकारी आवास की छत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के समय घर के अंदर उनकी पत्नी और बच्चे मौजूद थे। गनीमत रही कि बड़ा हादसा टल गया और परिवार बाल-बाल बच गया, लेकिन बच्चों को बचाने की कोशिश में आरक्षक भगत टंडन खुद घायल हो गए। उनके सिर और पैर में चोटें आई हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक छत गिरते ही घर के अंदर अफरा-तफरी मच गई। मलबे में घरेलू सामान दबकर टूट गया। घटना के बाद कॉलोनी में रहने वाले पुलिस परिवारों में डर और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहे हैं। लोगों का कहना है कि आज भगत टंडन के घर हादसा हुआ है, कल किसी और के घर भी ऐसी घटना हो सकती है।

अंग्रेजों के जमाने के मकान, कमजोर खपरैल और प्लास्टिक के सहारे कट रही जिंदगी पुलिस कॉलोनी में बने अधिकांश मकान बेहद पुराने बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार ये क्वार्टर अंग्रेजों के जमाने के बने हुए हैं। कई घरों की छत अब भी पुराने खपरे और कमजोर लकड़ी के सहारे टिकी हुई है। बारिश के समय छतों से लगातार पानी टपकता है, इसलिए कई परिवारों ने प्लास्टिक ढंककर किसी तरह रहने लायक बनाया हुआ है। कॉलोनी के आसपास बड़े पेड़ भी मौजूद हैं, जिनके गिरने का खतरा अलग बना रहता है। ऐसे हालात में छोटे बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा हमेशा चिंता का विषय बनी रहती है।

कई पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन क्वार्टर नहीं बदले

पुलिसकर्मियों का कहना है कि वर्षों से इन्हीं पुराने मकानों में परिवार रह रहे हैं। कुछ कर्मचारियों ने अपनी जेब से मरम्मत करवाई, लेकिन आखिर कब तक टूटे-फूटे ढांचे को सहारे देकर जिंदगी चलाई जाएगी?

स्थानीय लोगों ने बताया कि इस समस्या को लेकर पहले भी NKB National News में खबरें सामने आई थीं। राष्ट्रीय स्तर तक मामला उठाया गया, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

अब जब छत गिरने जैसी घटना सामने आ चुकी है, तब फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?

सवालों के घेरे में जिम्मेदार विभाग सरकारी पुलिस आवासों के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी आमतौर पर लोक निर्माण विभाग (PWD), पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन या संबंधित प्रशासनिक एजेंसियों की होती है।

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि मकान इतने जर्जर थे तो उनकी मरम्मत या पुनर्निर्माण क्यों नहीं कराया गया?क्या इन आवासों का कभी सुरक्षा निरीक्षण हुआ?क्या पुलिस परिवारों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं?जो जवान दिन-रात जनता की सुरक्षा में तैनात रहते हैं, क्या उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सिस्टम की जिम्मेदारी नहीं?

सुरक्षा देने वाले खुद असुरक्षित

यह घटना सिर्फ एक मकान की छत गिरने की खबर नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था की तस्वीर है जहां सुरक्षा देने वाले ही असुरक्षित जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

खरसिया पुलिस कॉलोनी की हालत अब सिर्फ मरम्मत नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग कर रही है।अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो अगली बार यह मामला “बाल-बाल बचने” तक सीमित नहीं रहेगा।

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