फरसगांव पुलिस का ऑपरेशन साइबर हंट, अंतर्राज्यीय ठगी गैंग का पर्दाफाश

दिल्ली से यूपी तक फैला था ठगी का जाल, फरसगांव पुलिस ने 7 साइबर ठगों को दबोचा

बीमा राशि दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड समेत 7 आरोपी गिरफ्तार

कोंडागांव जिले की फरसगांव पुलिस को एक बड़े अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह का खुलासा करने में बड़ी सफलता मिली है। करीब तीन महीने तक चली तकनीकी जांच, निगरानी और दिल्ली-उत्तर प्रदेश में लगातार दबिश के बाद पुलिस ने गिरोह के 7 सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

आरोपियों पर बीमा राशि दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी करने का आरोप है।

मामले की शुरुआत तब हुई जब फरसगांव थाना क्षेत्र के कोपरा बाजारपारा निवासी 57 वर्षीय शंकरलाल राणा ने शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें नवंबर 2025 में एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को “बीमा लोकपाल परिषद” का एजेंट बताते हुए कहा कि उनके नाम से बीएसई स्टॉक एक्सचेंज में 71 लाख रुपये से अधिक की राशि लंबित है, जिसे प्रक्रिया पूरी कर क्लेम किया जा सकता है।इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबरों से खुद को शिव शंकर पाण्डे, एम.के. बजाज, साक्षी शर्मा, बृजमोहन पाण्डे और दीपक सिंह बताने वाले ठगों ने फर्जी दस्तावेज भेजकर प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज के नाम पर किश्तों में करीब 29 लाख 69 हजार रुपये अलग-अलग खातों में जमा करवा लिए। जब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ तब उसने फरसगांव थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।

जांच में सामने आया कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से साइबर अपराध को अंजाम देता था। आरोपी दिल्ली के स्लम इलाकों में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लालच देकर उनके बैंक खाते खुलवाते थे। पहले आधार कार्ड में पता और मोबाइल नंबर बदलवाया जाता, फिर उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाकर पासबुक, एटीएम और सिम अपने कब्जे में रख लिए जाते थे।

इन्हीं खातों को “म्यूल अकाउंट” बनाकर ठगी की रकम ट्रांसफर की जाती थी।गिरोह का मास्टरमाइंड रजा हुसैन पहले भी साइबर अपराध के मामलों में जेल जा चुका है। पुलिस के मुताबिक आरोपी कॉलिंग के लिए छोटे कीपैड फोन और फर्जी सिम का इस्तेमाल करते थे ताकि पुलिस की निगरानी से बच सकें। कॉलिंग लोकेशन भी लगातार बदली जाती थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पंकज चन्द्रा और प्रभारी पुलिस अधीक्षक आकाश श्रीश्रीमाल के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कपिल चन्द्रा और एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई।

टीम ने करीब 10 दिन तक दिल्ली और उत्तर प्रदेश में डेरा डालकर तकनीकी विश्लेषण, बैंक डिटेल और सीडीआर लोकेशन के आधार पर आरोपियों को ट्रैक किया।पुलिस को भनक लगते ही आरोपी अंडरग्राउंड हो गए थे, लेकिन लगातार निगरानी और रणनीति के जरिए टीम ने दिल्ली, गाजियाबाद और बरेली से सातों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से म्यूल सिम, बैंक दस्तावेज और ठगी में इस्तेमाल सामग्री भी बरामद की है।गिरफ्तार आरोपियों में इसरार अहमद, आकिल, शिवम गुप्ता, नितिन कुमार त्यागी, रजा हुसैन, तरुण कौशिक और प्रदीप बघेल शामिल हैं।

पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और देशभर में फैले नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।

इस कार्रवाई में एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय के नेतृत्व में विशेष टीम ने काम किया। टीम में निरीक्षक राजकुमार सोरी, उप निरीक्षक शशिभूषण पटेल, प्रधान आरक्षक शैलेन्द्र ठाकुर, अजरंग बघेल, रामकुमार ठाकुर, लक्ष्मीनारायण शोरी, महिला आरक्षक सरस्वती यादव शामिल रहे।

सायबर टीम से प्रधान आरक्षक अजय बघेल और बीजू यादव की भी अहम भूमिका रही।इसके अलावा हेडक्वार्टर कोण्डागांव से डीएसपी नरेन्द्र पुजारी, निरीक्षक सौरभ उपाध्याय, थाना प्रभारी फरसगांव चन्द्रशेखर श्रीवास, प्रधान आरक्षक लूमन भंडारी, आरक्षक मनोज पोयाम और जीतू मरकाम ने भी कार्रवाई में सराहनीय योगदान दिया।

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