रायगढ़ में शुरू हुई Scientific Policing की नई उड़ान, FSL में पहुंचा पहला गांजा सैंपल,अब बिलासपुर नहीं दौड़ना पड़ेगा, रायगढ़ में ही होगी Narcotics, Blood और Forensic Evidence की जांच

Raigarh

SSP शशि मोहन सिंह ने बताया बड़ी उपलब्धि

रायगढ़। अपराध जांच की दुनिया में रायगढ़ ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ा दिया है। जिले में स्थापित क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) अब पूरी तरह से सक्रिय हो चुकी है और इसी के साथ थाना लैलूंगा से एनडीपीएस एक्ट के मामले में जब्त गांजा परीक्षण के लिए पहुंचने वाला पहला मादक पदार्थ बन गया है। यह केवल एक सैंपल जमा होने की घटना नहीं, बल्कि क्षेत्र में वैज्ञानिक और तकनीक आधारित पुलिसिंग की शुरुआत का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

17 जून 2026 को थाना लैलूंगा के प्रभारी उप निरीक्षक गिरधारी साव अपने स्टाफ के साथ जब्त गांजा को परीक्षण के लिए रायगढ़ स्थित क्षेत्रीय एफएसएल लेकर पहुंचे। प्रयोगशाला में जांच के लिए जमा किया गया यह पहला नारकोटिक्स सैंपल है, जिसने इस नई व्यवस्था को औपचारिक रूप से जमीन पर उतार दिया है।

तीन जिलों को मिलेगा सीधा फायदा रायगढ़ में शुरू हुई इस आधुनिक प्रयोगशाला का लाभ अब केवल रायगढ़ ही नहीं बल्कि सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की पुलिस को भी मिलेगा। इन जिलों में जब्त होने वाले व्हीसरा, मादक पदार्थ, ब्लड सैंपल, केमिकल और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच अब स्थानीय स्तर पर कराई जा सकेगी।

अब तक इन सभी सैंपलों को जांच के लिए बिलासपुर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजना पड़ता था, जिससे रिपोर्ट आने में लंबा समय लग जाता था। कई मामलों में जांच और अभियोजन की प्रक्रिया रिपोर्ट के इंतजार में प्रभावित होती थी।

सुशासन तिहार में हुआ था शुभारंभ गौरतलब है कि 17 मई 2026 को सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायगढ़ राजमहल के समीप स्थापित क्षेत्रीय न्यायिक विज्ञान प्रयोगशाला का लोकार्पण किया था। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस लैब में वर्तमान में NDPS, Chemistry और Biology से जुड़े परीक्षण किए जा रहे हैं फॉरेंसिक विशेषज्ञों के अनुसार स्थानीय स्तर पर जांच सुविधा उपलब्ध होने से न केवल रिपोर्ट जल्दी मिलेगी बल्कि अपराध अनुसंधान की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। इससे विवेचना की समय-सीमा घटेगी और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।

Crime Investigation में आएगी नई Speed विशेषज्ञ मानते हैं कि वर्तमान दौर में अपराध जांच केवल बयान और गवाहों तक सीमित नहीं रह गई है। वैज्ञानिक साक्ष्य अदालतों में सबसे मजबूत आधार बनकर उभर रहे हैं। ऐसे में क्षेत्रीय एफएसएल की शुरुआत पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया दोनों के लिए Game Changer साबित हो सकती है।

सीन ऑफ क्राइम यूनिट रायगढ़ के संयुक्त संचालक डॉ. पी.एस. भगत ने बताया कि नए आपराधिक कानूनों में फॉरेंसिक जांच को विशेष महत्व दिया गया है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध यह सुविधा वैज्ञानिक साक्ष्यों के परीक्षण को तेज और अधिक प्रभावी बनाएगी, जिससे अपराधों की विवेचना और अभियोजन दोनों मजबूत होंगे।

SSP शशि मोहन सिंह बोले वैज्ञानिक जांच ही आधुनिक पुलिसिंग की पहचानजिला पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) लागू होने के बाद फॉरेंसिक साक्ष्यों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि रायगढ़ में क्षेत्रीय एफएसएल की स्थापना अपराध अनुसंधान को नई दिशा देने वाली उपलब्धि है। स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक जांच सुविधा मिलने से विवेचना की गति, गुणवत्ता और पारदर्शिता में बड़ा सुधार आएगा। समयबद्ध फॉरेंसिक रिपोर्ट से गंभीर अपराधों की जांच मजबूत होगी, अभियोजन पक्ष को मजबूती मिलेगी और पीड़ितों को जल्द न्याय दिलाने में मदद मिलेगी।

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