पोरडा–चिमटापानी कोल परियोजना पर बढ़ा विरोध: सर्वे रोकने की मांग, प्रभावित ग्रामीणों ने SDM को सौंपा ज्ञापन
SECL से पारदर्शिता, 4 गुना मुआवजा, स्थायी रोजगार और ग्रामसभा की सहमति के बिना सर्वे नहीं करने की मांग

घरघोड़ा, रायगढ़। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड की प्रस्तावित पोरडा–चिमटापानी कोल परियोजना को लेकर अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। परियोजना से प्रभावित होने वाले कई गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर प्रशासन के सामने अपनी मांगें रख रहे हैं।
बुधवार को युवा कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष एवं पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष घरघोड़ा उस्मान बेग के नेतृत्व में प्रभावित ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घरघोड़ा और तहसीलदार को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी सभी मांगों पर लिखित निर्णय नहीं होता, तब तक भूमि सर्वेक्षण और परियोजना से जुड़ी किसी भी प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए।
प्रस्तावित परियोजना के अंतर्गत पोरडा, कठरापाली, कांटाझरिया, सिंघनपुर, कोनपारा और चिमटापानी सहित कई गांवों की कृषि भूमि अधिग्रहित किए जाने की संभावना है। इससे हजारों ग्रामीणों के सामने आजीविका, पुनर्वास, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक अस्तित्व जैसे गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2025 में केवल पोरडा गांव में सर्वे किया गया था, लेकिन आज तक परियोजना की वास्तविक स्थिति, प्रभावित परिवारों की सूची, मुआवजा नीति, रोजगार और पुनर्वास की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। ऐसे में अन्य गांवों में सर्वे शुरू करना उचित नहीं होगा।
ग्रामीणों ने रखीं ये प्रमुख मांगें ज्ञापन में मांग की गई कि सर्वे से पहले प्रत्येक भूमि स्वामी को अपनी जमीन का बंटांकन एवं राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त कराने का पूरा अवसर दिया जाए। इसके अलावा SECL परियोजना से जुड़ी सभी जानकारियां सार्वजनिक करे, ताकि हर प्रभावित परिवार को यह स्पष्ट हो सके कि उसकी कितनी भूमि अधिग्रहित होगी, कितना मुआवजा मिलेगा और पुनर्वास कहां किया जाएगा।ग्रामीणों ने वर्तमान बाजार मूल्य के आधार पर कम से कम चार गुना मुआवजा, मकान, पेड़, कुआं, बोरवेल, फसल सहित सभी परिसंपत्तियों का अलग मूल्यांकन कर पूर्ण भुगतान, प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी तथा ठेका और आउटसोर्सिंग कार्यों में 70 प्रतिशत स्थानीय रोजगार देने की मांग भी उठाई।

इसके साथ ही पुनर्वास स्थल पर पक्का मकान, सड़क, बिजली, पेयजल, स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा पूरे गांव का सामूहिक पुनर्वास सुनिश्चित करने की मांग की गई। वन अधिकार अधिनियम के लंबित दावों के निराकरण से पहले किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण या सर्वे नहीं करने की भी मांग ज्ञापन में शामिल है।
उस्मान बेग बोले— अधिकारों से समझौता नहीं युवा कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष उस्मान बेग ने कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर प्रभावित ग्रामीणों के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का हनन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन और SECL पहले मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और पर्यावरण संरक्षण की स्पष्ट नीति लिखित रूप में सामने रखें, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जाए
उन्होंने कहा कि यह ज्ञापन केवल आवेदन नहीं, बल्कि प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों की लड़ाई की पहली संगठित शुरुआत है। यदि समय रहते मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो यह आंदोलन आगे चलकर व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है।

ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर रायगढ़, पुलिस अधीक्षक रायगढ़, महाप्रबंधक SECL रायगढ़ क्षेत्र, क्षेत्रीय महाप्रबंधक बरौद–बिजारी क्षेत्र, तहसीलदार घरघोड़ा और थाना प्रभारी घरघोड़ा को भी भेजी गई है।
अब पूरे क्षेत्र की नजर प्रशासन और SECL के अगले कदम पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि प्रभावित ग्रामीणों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है और परियोजना की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।


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