धान खरीदी में 1.31 करोड़ की गड़बड़ी: दो महीने बाद संस्था प्रबंधक समेत दो गिरफ्तार, कलेक्टर पर लगाए आरोपों को प्रशासन ने बताया साजिश
सक्ती/डभरा। डभरा ब्लॉक के पुटीडीह धान खरीदी केंद्र में करीब 1.31 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए संस्था प्रबंधक शशिकांत महंत और प्राधिकृत अधिकारी श्यामा बाई को गिरफ्तार किया है। मामला नवंबर 2025 में सामने आया था, जब धान की बोरियों में मिट्टी मिलाए जाने की सूचना पर अधिकारियों की टीम ने खरीदी केंद्र में जांच की थी।
जांच के दौरान खरीदी केंद्र से करीब 4200 क्विंटल धान गायब होने की बात सामने आई थी। आरोप है कि गायब धान की भरपाई करने के लिए धान की बोरियों में मिट्टी मिलाकर उन्हें तैयार किया जा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन के निर्देश पर कार्रवाई शुरू हुई थी।
पहले एक आरोपी पर हुई थी FIR, बाद की जांच में सामने आए अन्य नाम
मामले में शुरुआत में खरीदी केंद्र प्रभारी प्रकाश महंत के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। हालांकि, बाद की जांच में संस्था प्रबंधक शशिकांत महंत, कंप्यूटर ऑपरेटर द्रोण प्रताप शांडिल्य और प्राधिकृत अधिकारी श्यामा बाई की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया।
इसके बाद 29 मई 2026 को सहकारिता विभाग की ओर से पत्र जारी कर अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए। इसी कार्रवाई के तहत अब शशिकांत महंत और श्यामा बाई की गिरफ्तारी की गई है।
गिरफ्तारी के बाद कलेक्टर पर लगाया टॉयलेट साफ कराने का आरोप
इसी बीच संस्था प्रबंधक शशिकांत महंत की ओर से 6 अगस्त 2026 को छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग के सचिव को शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में महंत ने सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो पर कलेक्टोरेट भवन में उनसे टॉयलेट साफ कराने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत के साथ घटना से संबंधित वीडियो उपलब्ध होने का भी दावा किया गया है।
कलेक्टर का पलटवार—भ्रष्टाचार की कार्रवाई से बचने की कोशिश
वहीं, कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए सिरे से खारिज किया है। कलेक्टर का कहना है कि शशिकांत महंत पिछले कुछ समय से अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई से बचने के लिए अलग-अलग प्रयास कर रहा था। उनके मुताबिक, कार्रवाई से बचने के लिए ही इस तरह के आरोप लगाए गए हैं।
कलेक्टर ने वीडियो को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने वास्तव में शशिकांत महंत से टॉयलेट साफ कराया होता, तो उसी घटना का वीडियो शिकायतकर्ता के पास कैसे पहुंचता। उनका कहना है कि कोई व्यक्ति कहीं भी जाकर टॉयलेट साफ करके उसका वीडियो बना सकता है, लेकिन इसे प्रशासन द्वारा कराया गया कृत्य बताना सही नहीं है।

कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि धान खरीदी में हुई कथित अनियमितता के मामले में कार्रवाई प्रक्रिया के तहत की गई है और किसी भी दबाव में कार्रवाई नहीं रोकी जाएगी।
अब दोनों मामलों की जांच से साफ होगी तस्वीर
एक तरफ धान खरीदी केंद्र में कथित अनियमितता को लेकर पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी हुई है, वहीं दूसरी तरफ संस्था प्रबंधक की मानव अधिकार आयोग में शिकायत के बाद कलेक्टर पर लगाए गए आरोपों की भी जांच का रास्ता खुला है। टॉयलेट साफ कराने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में शिकायत में लगाए गए आरोप और कलेक्टर की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण—दोनों के आधार पर जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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