छत्तीसगढ़ में खत्म होगा ‘पार्षद पति’ सिस्टम: महिला जनप्रतिनिधि की जगह पति-रिश्तेदार नहीं बन सकेंगे प्रतिनिधि या समन्वयक

छत्तीसगढ़ में खत्म होगा ‘पार्षद पति’ सिस्टम: महिला जनप्रतिनिधि की जगह पति-रिश्तेदार नहीं बन सकेंगे प्रतिनिधि या समन्वयक

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में अब निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके पति या परिवार के अन्य सदस्य आधिकारिक तौर पर कामकाज नहीं संभाल सकेंगे। राज्य सरकार ने ‘पार्षद पति’ के जरिए प्रतिनिधित्व की व्यवस्था पर रोक लगाते हुए नगरीय निकायों से जुड़े नियमों में संशोधन किया है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर दी है।नए प्रावधान के तहत किसी भी नगरीय निकाय में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा किसी अन्य निकट पारिवारिक सदस्य या नातेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि अथवा समन्वयक के रूप में नामनिर्दिष्ट या नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।

यानी जिस महिला को जनता ने चुनाव के जरिए प्रतिनिधि चुना है, उसके स्थान पर परिवार का कोई सदस्य आधिकारिक प्रतिनिधि बनकर बैठकों और निकाय से जुड़े कार्यों में भूमिका नहीं निभा सकेगा।राजपत्र में नियम में किया गया बदलावनगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने 6 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी की है।

इसमें वर्ष 2022 में बनाए गए प्रतिनिधि नामांकन से संबंधित नियमों में संशोधन किया गया है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह नया प्रावधान प्रभावी हो गया है। अधिसूचना का क्रमांक RULE-801/101/2026-UAD बताया गया है।

महिला जनप्रतिनिधियों को खुद निभानी होगी जिम्मेदारी

सरकार के इस फैसले का उद्देश्य महिला आरक्षण के जरिए निर्वाचित महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भूमिका सुनिश्चित करना बताया गया है। सरकार का तर्क है कि यदि महिला के निर्वाचित होने के बाद उसके स्थान पर पति या परिवार का कोई सदस्य काम करता है, तो महिला आरक्षण का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित होता है।

नए नियम के मुताबिक अब महिला पार्षद, अध्यक्ष या अन्य निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि की ओर से उनके परिवार का कोई सदस्य आधिकारिक प्रतिनिधि या समन्वयक के रूप में कार्य नहीं कर सकेगा।बैठकों और आधिकारिक कामकाज में भी रहेगी रोकनियम में बदलाव का असर उन स्थितियों पर भी पड़ेगा, जहां निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि की जगह उनके पति या अन्य परिजन बैठकों में प्रतिनिधित्व करते हैं।

नए प्रावधान के विपरीत किसी पारिवारिक सदस्य को प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया जाता है, तो ऐसी नियुक्ति मान्य नहीं होगी।

शिकायतों के बाद सरकार ने लिया फैसला

नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव के मुताबिक महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके परिवार के सदस्यों द्वारा बैठकों में शामिल होने और कामकाज में हस्तक्षेप किए जाने को लेकर शिकायतें सामने आती रही थीं। कुछ मामलों में महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके पति या अन्य परिजनों के बैठकों में शामिल होने और हस्ताक्षर करने की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए नियमों में संशोधन किया गया है।सरकार का कहना है कि महिला आरक्षण का उद्देश्य महिलाओं को राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया में वास्तविक भागीदारी देना है। इसलिए निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर परिवार के किसी सदस्य के काम करने की व्यवस्था को अब आधिकारिक मान्यता नहीं दी जाएगी।

राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में यह नया प्रावधान लागू हो गया है।

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