आधुनिकता ने छीना मिट्टी वालो के मुंह का निवाला ,गर्मी में गरीब कुम्हारों से मिट्टी का घड़ा अवश्य लें और उनको भी एक समय के भोजन का अवसर दें

गर्मी का गर्म माह जो कुम्हारों को जरूर सुकून देता है क्योंकि उनकी बनाई मिट्टी के घड़े , मटके ,सुराही ये सब ठंडी ठंडी पानी का जरिया होती है। इन मिट्टी के मटके की पानी की मिठास और ठंडक गर्म मौसम पर शांति की सुकून की ठंडक दे जाती है पर शायद अब नहीं क्योंकि आधुनिकता ने लोगों को इतना बेबस बना दिया है कि लोग अब मिट्टी के घड़े के बजाए फ्रीज का ठंडा पानी पीना अधिक पसंद करते है , प्लास्टिक की बॉटल्स में पानी भर कर फ्रिज के पानी को जितनी चाव से पीते है उतनी ही चाव से बीमारी भी उन्हें घेरती है , फ्रीज के पानी से कितने नुकसान पर लोगो को आधुनिकता और सहूलियत चाहिए ।

मिट्टी के घड़े को बनाने में एक कुम्हार को जितनी मेहनत लगती है उस घड़े के बिक जाने से उसे अधिक खुशी होती है क्योंकि इसी व्यवसाय से उनका घर चलता है उनके बच्चे पलते है , पर विलुप्त होती मिट्टी के घड़े की अहमियत ने इन गरीब कुम्हारों के मुंह का निवाला भी छीन लिया है ।।

मेरी इतनी सी विनती के इस गर्मी में उन गरीब कुम्हारों  की न सही पर अपनी सेहत की चिंता कर के  ही  मिट्टी के घड़े अवश्य लें और अपनी सेहत के साथ उन गरीबों को भी कुछ खाने का अवसर जरूर दें

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