जब कहीं नहीं है महिला सुरक्षित तो किस बात का महिला दिवस ???

आज कहने को तो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है पर क्या महिला के लिए वाकई में कोई दिवस विशेष है ??

आज कहने को तो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है पर क्या वाकई एक महिला इस देश में इस समाज में और स्वयं अपने ही घर में सुरक्षित है ??

आज कहने को तो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है पर क्या वाकई में महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार के वो आरोपी सजा काट रहे है ??

आज कहने को ही अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस है वरना एक महिला न कल सुरक्षित थी न आज सुरक्षित है और न आगे सुरक्षित रह सकेगी । क्योंकि इस पुरुष प्रधान देश में भले महिलाएं कितनी भी बाहर निकल जाए , कितनी भी तरक्की कर ले पर वो उन गंदी नजरों से आज भी सुरक्षित नहीं है ,वो भले हैं बाहर दुनिया के सामने किसी को आदेश देती हो पर  अपने ही घर में अपने ही पति अपने ही लोगों के गलत  आदेश को मानने को भी मजबूर है ।

आज जब एक महिला की शादी टूट जाती है वो अपने बच्चो को हाथों में लिए मायके की ओर रुख करती है तो उसे मायके में भाई भाभियों द्वारा कचरे की तरह फेंक दिया जाता है , समाज के ताने उसे मर जाने को मजबूर कर देते है पर वो उस समय वो औरत होती है जो मां है।  कैसे मर सकती है वो औरत जो एक मां है ।अपने बच्चो को लेकर न्यायालय के चक्कर लगाती है ताकि उसे अत्याचारी पति ससुराल वालों के खिलाफ न्याय मिल सके पर हमारे देश का शिथिल और कमजोर कानून जिसे न महिलाओं के साथ हुए अन्याय में पल पल जीवन काट रही महिलाओं ,बच्चो की फिकर है न उनके जीवन में होने वाले मुश्किलों की वो न्यायालय केवल तारीख पर तारीख दे कर महिला की मौत तक उसे तारीख देता रह जाता है और  महिला की मौत के साथ याय की उम्मीद भी खत्म हो जाती है , उसके बच्चे अनाथ बेसहारे हो कर या तो समाज के गुंडे बदमाश बन जाते है या समाज के कचरे की तरह बड़े हो जाते है।

क्या कहें देश के कानून को , जो एक महिला को सशक्त नहीं बना सकत्व, जरूरत मंद महिलाओं को ही बेसहारा छोड़ कर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाता है ?

ये अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उन महिलाओं  के लिए है जो मजबूत है सशक्त है और ऊंचे पद पर है ये दिवस उन महिलाओं के लिए नहीं जिन्हें वाकई में जरूरत है सशक्त होने की आगे बढ़ने की,उनके सुरक्षित भविष्य की ।

पूजा जायसवाल (  एक महिला )

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