महिला शक्ति की मिसाल: दर्रामुड़ा का गुडगहन गांव हुआ नशा मुक्त, रात में गश्त कर रही हैं महिलाएं

महिला शक्ति की मिसाल: दर्रामुड़ा का गुडगहन गांव हुआ नशा मुक्त, रात में गश्त कर रही हैं महिलाएं

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🚨रायगढ़, 2 नवंबर।पुलिस की पहल और महिला शक्ति के संकल्प से ग्राम पंचायत दर्रामुड़ा के गुडगहन डिपापारा ने इतिहास रच दिया है। अब यह गांव पूरी तरह नशा मुक्त हो चुका है ,जहां कभी अवैध शराब बनती थी, वहीं आज महिलाएं टॉर्च और डंडा लेकर रात्रि गश्त करती दिखाई देती हैं।

थाना जूटमिल पुलिस के थाना प्रभारी निरीक्षक प्रशांत राव की जनजागरण मुहिम ने इस बदलाव की नींव रखी। अवैध शराब के दुष्परिणामों पर लगातार चौपालें और जागरूकता बैठकें आयोजित की गईं, जिससे गांव की महिलाओं ने एक स्वर में “अब नहीं पीने देंगे, अब नहीं बेचने देंगे” का नारा बुलंद किया।महिलाओं के नेतृत्व में गांव की 49 महिलाएं और 35 पुरुषों ने मिलकर “महिला निगरानी समूह” का गठन किया

गांव में कुल 12 टीम बनाई गई हैं

हर टीम के पास गश्त का रोस्टर है

रोज रात को टॉर्च और डंडे के साथ राउंड लगाते हैं ताकि कोई शराब न बनाए और न पिए।

गांव में अब शांति और सौहार्द का माहौल है — न झगड़े, न विवाद, न नशे की गंध।

इन महिलाओं ने केवल शराबबंदी ही नहीं की, बल्कि झगड़े-फसाद की स्थिति में घर-घर जाकर सुलह कराना भी अपनी जिम्मेदारी बना ली है।सरपंच क्षितेश्वर गुप्ता ने बताया कि पहले दो लोगों को अवैध शराब बनाते पकड़ा गया था, जिन्हें जेल भेजा गया और ग्रामसभा ने निर्णय लिया कि उनकी जमानत नहीं ली जाएगी।यह सख्त निर्णय गांव के सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ।

थाना जूटमिल परिसर में आयोजित सम्मान समारोह में निरीक्षक प्रशांत राव ने महिला समूह और सरपंच क्षितेश्वर गुप्ता को सम्मानित किया और कहा “दर्रामुड़ा का यह उदाहरण पूरे जिले के लिए प्रेरणा है। शराब झगड़े और अपराध का बड़ा कारण है। अब महिला शक्ति की मदद से अन्य गांवों को भी नशा मुक्त बनाया जाएगा।”

इस प्रेरक पहल से प्रभावित होकर पड़ोसी ग्राम डूमरपाली ने भी अपनी महिला टीम बनाकर रात्रि गश्त शुरू कर दी है।दर्रामुड़ा की ये बहादुर महिलाएं अब गांव की असली प्रहरी हैं ,दिन में परिवार संभालती हैं, और रात में गांव की रक्षा करती हैं।

नशा मुक्त समाज की मिसाल – दर्रामुड़ा की महिला शक्ति *









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