विवाह से पूर्व सिकलसेल जांच को लेकर विप्र स्वास्थ्य सेवा संगठन की पहल
—भावी पीढ़ी को सिकलसेल जैसी गंभीर बीमारी से बचाने का अभियान तेज़
रायपुर। सिकलसेल एनीमिया जैसी आनुवंशिक बीमारी से बचाव को लेकर रायपुर स्थित विप्र स्वास्थ्य सेवा संगठन ने एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल शुरू की है। संगठन का उद्देश्य है कि समाज में विवाह से पूर्व केवल कुंडली नहीं, बल्कि सिकलसेल की जांच को भी अनिवार्य परंपरा के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि भावी पीढ़ी को इस गंभीर और जीवनभर पीड़ा देने वाली बीमारी से सुरक्षित रखा जा सके।
संगठन के अध्यक्ष डॉ. सतीश दीवान ने बताया कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में सिकलसेल के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं और यदि समय रहते विवाह योग्य युवक-युवतियों की जांच करवा ली जाए, तो इसके प्रसार को रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि संस्था द्वारा समय-समय पर जागरूकता शिविर, परामर्श सत्र और जांच कैंप आयोजित किए जा रहे हैं।
इस अभियान में सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ ज्योतिषाचार्यों की भूमिका को भी अहम माना जा रहा है। संगठन के सदस्य और ज्योतिषाचार्य पंडित कान्हा शास्त्री ने बताया कि जैसे हम विवाह से पहले ग्रह-नक्षत्रों की अनुकूलता देखते हैं, उसी प्रकार अब यह भी ज़रूरी है कि हम रक्त की अनुकूलता यानी सिकलसेल की स्थिति भी जांच लें। यह एक धार्मिक नहीं बल्कि मानवीय और वैज्ञानिक ज़िम्मेदारी है।
जनहित में चलाई जा रही इस मुहिम से जुड़ने के इच्छुक व्यक्ति या संस्थाएं डॉ. सतीश दीवान (मो. 9340348805) या पं. कान्हा शास्त्री (मो. 07974757535) से संपर्क कर सकते हैं।
संगठन ने अपील की है कि सभी वर्ग इस अभियान में सहभागी बनें और विवाह पूर्व सिकलसेल जांच को एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करें।
विवाह से पूर्व सिकलसेल जांच को लेकर विप्र स्वास्थ्य सेवा संगठन की पहल













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