खरसिया क्षेत्र में लंबे समय से लंबित ओवरब्रिज निर्माण कार्य को लेकर तरह-तरह की चर्चाएँ होती रहीं। कई बार लोगों ने सवाल भी उठाए कि आखिर काम क्यों नहीं हो रहा है।इस पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि काम को जानबूझकर राजनीतिक कारणों से रोका गया, ताकि श्रेय किसी और को मिल सके।
सच क्या है?
जानकारी के मुताबिक:
इस परियोजना को वर्ष 2021 में स्वीकृति मिली थी।2022 में सर्वे, ड्राइंग और डिज़ाइन तैयार कर अनुमोदन दिया गया।अन्य विभागों से आवश्यक अनुमतियाँ भी 2022 तक मिल गईं।2023 में भूमि अधिग्रहण और टेंडर की प्रक्रिया पूरी की गई।नगर पालिका द्वारा जमीन भी खाली करा दी गई।लेकिन सरकार बदलने के बाद वित्त विभाग से काम को रोक दिया गया। यही वजह रही कि परियोजना अटक गई।
उमेश पटेल की भूमिका
स्थानीय विधायक उमेश पटेल ने लगातार इस मामले को सरकार और विभागीय अधिकारियों के सामने उठाया। उन्होंने बार-बार पत्राचार कर और व्यक्तिगत रूप से चर्चा कर काम को आगे बढ़ाने की कोशिश की।आज जो ओवरब्रिज निर्माण के लिए फिर से अनुमति मिल रही है, वह दरअसल उमेश पटेल के निरंतर प्रयासों और लगन का ही नतीजा है।लोगों का मानना है कि अगर वे लगातार आवाज़ न उठाते तो यह काम शायद और भी वर्षों तक अधर में लटक जाता।

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