छत्तीसगढ़ के अखिलेश पांडे के प्रयासों से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव

छत्तीसगढ़ के अखिलेश पांडे के प्रयासों से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के नियमों में ऐतिहासिक बदलाव

अब बोली में बनी फिल्मों को भी मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार

बिलासपुर (छत्तीसगढ़)।
कहा जाता है कि जब कोई कलाकार अपने जुनून पर उतर आता है, तो इतिहास बदल जाता है। ऐसा ही कर दिखाया है छत्तीसगढ़ के फिल्म अभिनेता, निर्माता और निर्देशक अखिलेश पांडे ने।

अखिलेश पांडे ने किन्नर समुदाय के संघर्ष और उत्थान पर आधारित अपनी छत्तीसगढ़ी फीचर फिल्म ‘किरण’ बनाई थी। इस फिल्म ने दुनिया के 20 से अधिक देशों में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवलों में 63 से ज्यादा अवार्ड जीते और गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपना नाम दर्ज कराया।

लेकिन जब 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के लिए नामांकन की बात आई, तो ‘किरण’ को केवल इसलिए शामिल नहीं किया गया क्योंकि छत्तीसगढ़ी भाषा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज नहीं है।

इससे दुखी होकर अखिलेश पांडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति, और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को एक विस्तृत पत्र भेजा। पत्र में उन्होंने बताया कि उनकी फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है, फिर भी सिर्फ भाषा के कारण उसे राष्ट्रीय सम्मान से वंचित कर दिया गया।

उनके इस पत्र को प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लिया और 18 अगस्त 2025 को पीएमओ द्वारा सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को यह मामला भेजा गया।

इसके बाद 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए नियमों में ऐतिहासिक संशोधन किया गया। अब नई व्यवस्था के तहत,

“भारत की आठवीं अनुसूची में दर्ज भाषाओं के अलावा, देश की अन्य क्षेत्रीय बोलियों में बनी फिल्मों को भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में स्थान दिया जा सकेगा। परंतु इसके लिए संबंधित राज्य के गृह सचिव या कलेक्टर द्वारा उस बोली के प्रचलन की पुष्टि करनी होगी।”

यह संशोधन देशभर के उन कलाकारों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है जो अपनी स्थानीय बोली में सिनेमा बना रहे हैं।

अखिलेश पांडे ने कहा —

“जब मेरी फिल्म ‘किरण’ को राष्ट्रीय पुरस्कार की सूची से बाहर किया गया, तब मैं बेहद दुखी हुआ। मैंने ठान लिया कि इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाऊंगा। यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि उन हजारों कलाकारों की लड़ाई थी जिनकी भाषा या बोली आठवीं अनुसूची में नहीं है।”

अब उनके प्रयासों से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का इतिहास ही बदल गया है।
आज भारत के हर कोने में बनने वाली क्षेत्रीय और बोलचाल की भाषाओं की फिल्में भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान पा सकेंगी।

अखिलेश के इस जुनून और संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि सच्ची लगन और निडरता से की गई कोशिशें एक दिन जरूर रंग लाती हैं।

NKB National News प्रस्तुत करता है

🌆 सिटी हलचल 🌆

अब आपकी आवाज़, आपकी खबर
अगर आपके शहर में कोई हलचल, घटना, समस्या या खास जानकारी है

तो आप उसे वीडियो या सूचना के रूप में हमें भेज सकते हैं।

📩 आपकी भेजी गई सामग्री

नियमों के अनुसार और सत्यापन के बाद
हमारे मंच पर प्रकाशित की जाएगी।

“हर शहर की खबर, अब आपकी नजर से”
NKB नेशनल न्यूज – सच्चाई के साथ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!