कानून की कड़ाई और इंसाफ की जीत: मानववध के आरोपी को 10 साल सश्रम कारावास
इंस्पेक्टर कुमार गौरव साहू की तेज़, निष्पक्ष और वैज्ञानिक विवेचना ने दिलाई कड़ी सजा
रायगढ़, 6 दिसंबर। रायगढ़ पुलिस ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर जांच ईमानदारी, संवेदनशीलता और दृढ़ता से की जाए, तो किसी भी आरोपी को कानून की पकड़ से बचना नामुमकिन है। पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल के मार्गदर्शन में काम कर रहे तत्कालीन खरसिया टीआई और वर्तमान में घरघोड़ा थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव साहू ने अपने बेहतरीन विवेचना कौशल से एक संवेदनशील मानववध केस को अंजाम तक पहुंचा दिया।
अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक पी.एन. गुप्ता ने कोर्ट में प्रभावी तर्क, ठोस साक्ष्य और दमदार जिरह के साथ केस को जिस मजबूती से रखा, वह इस फैसले का अहम आधार बना। इसी सशक्त पक्ष-विवेचना के चलते आरोपी कुशल चौहान, उम्र 41 वर्ष, निवासी बाम्हनपाली को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹100 अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
यह फैसला सत्र न्यायाधीश रायगढ़ जितेंद्र कुमार जैन द्वारा सत्र प्रकरण क्रमांक 114/2024 (थाना खरसिया अपराध क्रमांक 544/2024) में सुनाया गया।
घरेलू हिंसा से शुरू हुआ मामला, मौत पर खत्म – फिर कानून ने ली कड़ी परीक्षा
11 सितंबर 2024 की रात ग्राम पंचायत बाम्हनपाली से घरेलू विवाद की दिल दहला देने वाली सूचना मिली। बताया गया कि आरोपी ने अपनी पत्नी विमला खड़िया के साथ निर्ममता से मारपीट की। उसे घसीटकर कमरे में ले जाकर बांस के डंडे से बेरहमी से पीटा गया।
परिजनों द्वारा डॉयल-112 पर कॉल करने के बाद घायल महिला को सिविल अस्पताल खरसिया में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मर्ग कायम कर थाना खरसिया में अपराध दर्ज किया गया।
तेज़ और वैज्ञानिक जांच – न्यायालय भी हुए प्रभावित
निरीक्षक कुमार गौरव साहू ने मामले की जाँच में जिस तीव्रता और प्रोफेशनलिज़्म का परिचय दिया, वह पुलिस विभाग के लिए गर्व का विषय बना।
● आरोपी की त्वरित गिरफ्तारी
● मेमोरेंडम पर घटना में प्रयुक्त बांस का डंडा और खून से सने कपड़ों की बरामदगी
● पटवारी नक्शा
● गवाहों के बयान
● फॉरेंसिक रिपोर्ट
● हर तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य का पुख्ता संकलन
बैक-टू-बैक सफलता—एक और बड़ी मिसाल
उल्लेखनीय है कि निरीक्षक गौरव साहू की विवेचना में हाल ही में थाना दीनदयाल नगर रायपुर के हत्या प्रकरण में भी आरोपी को आजीवन कारावास की सजा दिलाई जा चुकी है। और अब लगातार दूसरे गंभीर मामले में कड़ी सजा दिलाकर उन्होंने यह सिद्ध किया है कि न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी उतनी ही मजबूत है।
यह फैसला सिर्फ एक आरोपी की सजा नहीं, बल्कि घरेलू हिंसा के खिलाफ समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि अपराध कितना भी निजी क्यों न हो, कानून हर पीड़ित के साथ खड़ा है।













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