धौराभांठा की ठंडी रात में उम्मीद की गर्माहट — प्रभावित ग्रामीणों के बीच पहुंचे उमेश पटेल, जनसंघर्ष को दिया मजबूत सहारा
रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड के धौराभांठा और 14 प्रभावित ग्रामों के ग्रामीण जिंदल कोल माइंस की प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध में कई दिनों से धरने पर बैठे हुए हैं।खुले आसमान के नीचे तपन भरी धूप से लेकर हड्डियाँ चीर देने वाली रात तक ग्रामीणों का संघर्ष जारी है।
इसी बीच आज इस आंदोलन को एक बड़ी ताकत मिली जब प्रदेश के लाडले, युवाओं की आवाज़, और हर संकट में सबसे पहले पहुंचने वाले नेता उमेश पटेल खुद धौराभांठा पहुंचे।
उनके साथ छत्तीसगढ़ कांग्रेस की सहप्रभारी जरीता लैतफलांग, लैलूंगा विधायक श्रीमती विद्यावती सिदार, और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की बड़ी टीम मौजूद रही।
लेकिन असली दृश्य जिसने सबका दिल छू लिया उमेश पटेल ग्रामीणों के बीच ठंडी जमीन पर बैठकर पूरी रात साथ रहे।न कोई दूरी, न कोई औपचारिकता…बस संघर्ष में डटे लोगों का साथ निभाने का मानवीय भाव।आपकी ज़मीन, आपका अधिकार… इसे कोई नहीं छीन सकता” उमेश पटेल धरने में मौजूद महिलाओं, किसानों और युवाओं से बात करते हुए उमेश पटेल ने साफ कहा कि जनसुनवाई को लेकर ग्रामीणों की आशंकाएं जायज़ हैं विकास किसी की ज़मीन, घर और भविष्य को कुर्बान करके नहीं हो सकता कांग्रेस जनता की आवाज़ के खिलाफ कोई भी निर्णय स्वीकार नहीं करेगी
उनका ये भरोसा ग्रामीणों के लिए ठंडी रात में सबसे बड़ी गर्माहट बना।जब नेता नहीं, बेटा बनकर साथ बैठे… तब भरोसा और मजबूत होता है ,धौराभांठा के लोगों ने कहा“आज पहली बार लगा कि कोई हमारी तकलीफ समझने आया है, फॉर्मलिटी करने नहीं।”
उमेश पटेल ने बुज़ुर्गों की पीड़ा सुनी महिलाओं की चिंता समझी युवाओं की रोज़गार और जमीन से जुड़ी फिक्र को गंभीरता से लिया और फिर पूरी नर्मता और दृढ़ता से कहा“आप अकेले नहीं हो… जब तक ये संघर्ष चलेगा, हम आपके साथ खड़े रहेंगे।”
धौराभांठा की लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं, अपने अस्तित्व की लड़ाई है 14 गांवों के लोगों ने साफ कर दिया है कि वे बिना सहमति के कोई जनसुनवाई, कोई माइंस, कोई अधिग्रहण मंजूर नहीं करेंगे।और ऐसे गंभीर समय में उमेश पटेल का पहुंचना राजनीति का मानवीय चेहरा और जनता के संघर्ष का लोकतांत्रिक सम्मानदोनों को मजबूती देता है।























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