नाबालिगों को न्याय दिलाने में जशपुर पुलिस की सख्त और संवेदनशील कार्रवाई
जशपुर, 22 दिसंबर।महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों को लेकर जशपुर पुलिस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि संवेदनशील मामलों में लापरवाही नहीं, बल्कि त्वरित और ठोस कार्रवाई ही उसकी प्राथमिकता है।
जिले के दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में नाबालिग बालिकाओं के साथ दुष्कर्म के गंभीर मामलों में जशपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया।
चौकी दोकड़ा क्षेत्र के मामले में 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा की तबीयत बिगड़ने पर इलाज के दौरान उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। बाद में रायपुर के अस्पताल में नाबालिग ने एक बच्ची को जन्म दिया। परिजनों की रिपोर्ट पर मामले की गंभीरता को समझते हुए जशपुर पुलिस ने बिना देरी किए जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपी लक्ष्मण राम (19 वर्ष) ने नाबालिग को शादी का झांसा देकर अलग-अलग समय पर शारीरिक शोषण किया।घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था, लेकिन जशपुर पुलिस ने हार नहीं मानी। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी की लोकेशन पुणे, महाराष्ट्र में ट्रेस की गई। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर गठित पुलिस टीम ने सैकड़ों किलोमीटर दूर जाकर आरोपी को पकड़कर जशपुर लाया।
यह कार्रवाई जशपुर पुलिस की पेशेवर दक्षता और प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
दूसरा मामला थाना आस्ता क्षेत्र का है, जहां 17 वर्षीय नाबालिग बालिका के पेट दर्द की जांच के दौरान गर्भवती होने की पुष्टि हुई। पीड़िता ने बताया कि आरोपी संजीत टोप्पो (19 वर्ष) ने प्रेम और विवाह का झांसा देकर उसका दैहिक शोषण किया। मामला सामने आते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी की तलाश शुरू की और उसे उसके घर से घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया।
दोनों ही मामलों में जशपुर पुलिस ने संवेदनशीलता के साथ पीड़ित परिवारों को कानूनी सहयोग उपलब्ध कराया और भारतीय न्याय संहिता व पॉस्को एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मजबूत केस तैयार कर आरोपियों को न्यायालय में पेश किया।
अदालत के आदेश पर दोनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में जशपुर पुलिस लगातार यह संदेश दे रही है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए जिले में कोई जगह नहीं है। पुलिस की इस कार्रवाई से न सिर्फ पीड़ित परिवारों को न्याय की उम्मीद मिली है, बल्कि समाज में यह भरोसा भी मजबूत हुआ है कि कानून उनके साथ खड़ा है।
जशपुर पुलिस की यह कार्रवाई नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर एक मजबूत उदाहरण है, जो यह दर्शाती है कि सतर्कता, संवेदनशीलता और सख्ती—तीनों के संतुलन से ही न्याय संभव है।














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